ओरछा के दर्शनीय (पर्यटन) स्थल । ओरछा मंदिर रामलला की कहानी|Orchha Mandir Ki Kahani - Daily Hindi Paper | RPSC Online GK in Hindi | GK in Hindi l RPSC Notes in Hindi

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मंगलवार, 1 फ़रवरी 2022

ओरछा के दर्शनीय (पर्यटन) स्थल । ओरछा मंदिर रामलला की कहानी|Orchha Mandir Ki Kahani

ओरछा के दर्शनीय पर्यटन स्थल ओरछा मंदिर रामलला की कहानी 

ओरछा के दर्शनीय पर्यटन स्थल । ओरछा  मंदिर रामलला की कहानी|Orchha Mandir Ki Kahani


 

ओरछा मंदिर रामलला की कहानी 

  • बुंदेला राजाओं के शौर्य का गवाह है ओरछा। अयोध्या में विराजे भगवान श्रीराम की तरह ओरछा में भी भगवान श्रीराम विराजमान हैं। ओरछा में आज भी भगवान श्रीराम राजा हैं। भगवान श्रीराम की सुरक्षा में सरकारी खर्च पर सैनिक तैनात हैं। विशेष मौके पर भगवान श्रीराम को तोप की सलामी दी जाती है। ओरछा में भगवान श्रीराम रामलला सरकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। महलों और मंदिरों वाले ओरछा नगर में पाषाण का सौन्दर्य बिखरा पड़ा है। पापाण के सौंदर्य को देखकर प्रतीत होता है, मानो समय यहाँ ठहर गया हो। ओरछा के मंदिर और महल पुरातन गरिमा को बरकरार रखे हुए हैं।

 

  • सोलहवीं सदी में रूद्रप्रताप ने ओरछा राज्य की स्थापना की थी। रूद्रप्रताप बुंदेला राजपूत थे। रूद्रप्रताप बुंदेला ने ओरछा राज्य का चयन पवित्र नदी बेतवा के तट पर राजधानी बनाने के लिए किया था। बुंदेला राजपूत वंश में पराक्रमी राजा वीरसिंह जूदेव हुए हैं। राजा वीर सिंह जूदेव ने 17वीं सदी में जहांगीर महल का निर्माण करवाया था। ओरछा नगर में प्रासादों और के स्थापत्य की भव्यता मन में समाने वाली है। ओरछा सिर्फ धार्मिक नगर ही नहीं वरन् स्मारक और मकबरों की धरोहर है। ओरछा का प्रत्येक स्मारक प्राचीन वैभव और गरिमा को संजोए हुए है।

 

  • ओरछा राज के संस्थापक बुंदेला राजपूत शासकों के बारे में कहा जाता है कि बुंदेला शासक अपनी आन-बान-शान के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। रामलला का मंदिर भी बुंदेला राजाओं की शान का प्रतीक है।

रामलला मंदिर ओरछा मंदिर की मान्यता  एवं कहानी 

  • रामलला मंदिर की वही मान्यता है जो अयोध्या में विराजे भगवान श्रीरामचन्द्रजी की है। किंवदंती है कि ओरछा के शासक धर्म के प्रति आसक्त राजा मधुकर शाह को स्वप्र में भगवान श्रीराम के दर्शन हुए। राजा मधुकर शाह भगवान श्रीराम के स्वप्न में दिए निर्देश पर अयोध्या से उनकी प्रतिमा लाए थे। मंदिर में मूर्ति की स्थापना के पहले राजा मधुकर शाह ने मूर्ति को स्थान पर रख दी थी। प्राण-प्रतिष्ठा के समय जब मूर्ति को हटाना असंभव हो गया तब राजा मधुकर शाह को भगवान का निर्देश याद आया कि वह जिस स्थान पर विराजमान हो जाएंगे वहाँ से हटाए नहीं जाएंगे। यही कारण कि रामलला सरकार महल में विराजे हैं। राजमहल की भव्यता, सुदरता, वास्तु कला, गगनचुम्बी कलश के कारण यह मंदिर भारत में विख्यात है। देश का यह पहला मंदिर है जहाँ भगवान श्रीराम की पूजा राजा की तरह होती है। राजा की तरह पूजे जा के कारण भगवान श्रीराम को सरकार का संबोधन किया गया है। मंदिर के रूप में रूपांतरित महल में मध्यप्रदेश की पुलिस को टुकड़ी यहाँ साल भर तैनात रहती है। श्रीराम नवमी, दशहरा पर्व पर भगवान श्रीराम की गजा की तरह सलामी दी जाती है। तोप से स्वागत किया जाता है। पुलिस के सिपाही घड़ों के अनुसार पहरा देते हैं। इस मंदिर में धार्मिक आयोजन के ि प्रशासन को स्वीकृति अनिवार्य होती है। साल भर देश एवं विदेश से पर्यटक रामलला सरकार के मंदिर के दर्शन एवं भ्रमण के लिए ओरछा आते हैं। शांत बेतवा नदी के तट पर बने महल के रामलला सरकार मंदिर में आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होती हैं।

 ओरछा में चतुर्भुज मंदिर 

  • ओरछा में चतुर्भुज मंदिर स्थापत्य का उत्कृष्ट नमूना है। अयोध्या से लाई गई भगवान श्रीराम की मूर्ति स्थापना के लिए) निर्मित इस मंदिर को पत्थरों के बड़े चबूतरे पर निर्मित किया गया है। भगवान रामलला सरकार जब इस मंदिर में विराजमान नहीं हुए तो इस मंदिर में धार्मिक महत्व के कमल एवं अन्य चिन्ह स्थापित कर दिए गए। इस मंदिर के प्रतीक स्थल का गर्भगृह आकर्षक है। गर्भगृह की मेहराबदार दीवारें मंदिर की पवित्रता का आभास कराती हैं।


ओरछा में निर्मित राजमहल 

  • ओरछा में निर्मित राजमहल का निर्माण राजा मधुकर शाह ने करवाया था। राजमहल की बहिरंग की सादगी और सुंदर छत्रियों का आकर्षण यात्रियों को लुभाता है। धार्मिक भावनाओं से अभिभूत होकर रंगों से महल को सजाया गया है। वर्तमान में इस राजमहल में ध्वनि और प्रकाश का चित्ताकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाता है। एक घंटे के ध्वनि और प्रकाश कार्यक्रम में हिन्दी और अंग्रेजी में ओरछा के इतिहास का चित्रण किया जाता है।


अष्ट कोणीय पुष्पकुंज वाला राय प्रवीण महल

  • अष्ट कोणीय पुष्पकुंज वाला राय प्रवीण महल भी ओरछा की पुरातन संपदा की गवाही देता है। इतिहास में वर्णित है कि कवयित्री और संगीत में प्रकोण राय प्रवीण की कला साधना की चर्चा दिल्ली तक पहुंची। शहंशाह अकबर ने उन्हें दिल्ली बुलवा लिया। अकबर राय प्रवीण की कला से अत्यंत प्रभावित हुए। राय प्रवीण ने अकबर के प्रेम प्रस्ताव पर दृढ़ता से इंकार करने हुए राजा इन्द्रमणि राय के प्रति पवित्र प्रेम का इजहार किया। अकबर राय प्रवीण की स्पष्टवादिता और दृढ़ता से प्रभावित हो गए। अकबर ने राय प्रवीण को सम्मान सहित ओरछा भेज दिया। राजा इन्द्रमणि ने राय प्रवीण के लिए ईंटों से दो मंजिल का महल बनवा दिया। महल के सुंदर बगीचों और उपयोग जलप्रदाय प्रणाली से राय प्रवीण महल की सुंदरता में चार चांद लग गए हैं।

 

  • 17वीं सदी में जब शहंशाह जहांगीर ओरछा घूमने आए तो शहंशाह ओरछा का वैभव देख मुग्ध हो गए। राजा वीर सिंह जूदेव ने शहंशाह जहांगीर की यात्रा की स्मृति में महल बनवा दिया। इस जहांगीर महल की मजबूत प्राचीर, छत्रियां और पत्थर पर महीन जालियों का काम अलौकिक कला का प्रदर्शन करती है।

 

  • राजा रामलला सरकार के महल में बने मंदिर से होकर भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। इस मंदिर की वास्तु कल्पना बुंदेला राजपूत शासकों की दूरदृष्टि को दर्शाता है। इस मंदिर में मंदिर और दुर्ग शैली का अद्भुत समन्वय है। मंदिर के भीतर के भाग में ओरछा की भित्ति चित्रकला के सुंदर नमूने देखने को मिलते हैं। मंदिर के तीन कमरों और दीवारों पर बने चित्र ऐसे प्रतीत होते हैं मानो वह बोल पड़ेंगे। लक्ष्मी नारायण मंदिर की उचित देखरेख के कारण दीवारों के चित्रों के रंग ताजगी लिए हुए हैं।

 

ओरछा में बुंदल राजा दीवान हरदौल का महल 

  • ओरछा में बुंदल राजा दीवान हरदौल का महल है। पूरे बुंदेलखंड में आज भी हरदौल को देवताओं की तरह पूजा जाता है। हरदौल को देवनाओं जैसा मान मिलने का कारण उनके द्वारा किए गए बलिदान की कहानी है। वीर सिंह जूदेव के पुत्र हरदौल के बड़े भाई जुझार सिंह ने जब भाभी के साथ प्रीति पर संशय प्रगट किया तब राजा हरदौल सिंह ने निचल प्रीति प्रकट करने के लिए प्राणोत्सर्ग कर दिया था। बुंदेलखंड के संस्कृति में बुंदेला हरदौल जूदेव की भाभी के प्रति निश्चल प्रांति के किस्से लोक गीतों में विद्यमान हैं। बुंदेलखंड के ग्रामों में हरदौल राजा की स्मृति में चबूतरे बने हुए हैं। इन चबूतरों पर ग्रामवासी मांगलिक अवसरों पर मूक रूप से आशीर्वाद मांगते हैं।

 

  • राजा जुझार के पुत्र धुर्जबान की स्मृति में खड़ा ध्वस्त हो चुका महल सुंदर महल अनेक कहानियों को समेटे हुए है। धुर्जबान ने दिल्ली में मुसलमान युवती से विवाह कर लिया था। बाद में धुर्जबान ने अपना जीवन भजन-पूजन में बिताया और संत हुए।


 ओरछा में ओहरेद्वार का हनुमान मंदिर

  • ओरछा में ओहरेद्वार का हनुमान मंदिर मुगल किशोर जानकी मंदिर, सिद्ध बाबा का स्थान बेतवा किनारे कंचन घाट पर बनी ओरछा राजाओं को स्मृति वाली छत्रियाँ, चंद्रशेखर आजाद की स्मृति में निर्मित शहीद स्मारक भवन दर्शनीय स्थल है। चंद्रशेखर आजाद 1926-1927 में ओरछा में छुपकर रहे थे। मध्य सरकार द्वारा निर्मित स्मारक परिसर में चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा भी स्थापित है। पुरातत्व और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए पुरुषोत्तम दास का मकान, दरोगा की कोठी, रहमान दरजी की कोठी, सिद्ध बाबा की गुफा, श्याम दाऊ की कोठी, तोपखाना, टकसाल भवन, भगवंत राय की हवेली, नारायणदास खरे की कोठी, कृपाराम गौर की हवेली, गुंदरई दरवाजा, पालकी महल, फूल बाग ओरछ के पास दर्शनीय स्थल हैं।

 ओरछा पहुंचने के लिए

  • ओरछा पहुंचने के लिए दिल्ली, भोपाल, इंदौर, मुंबई से ग्वालियर के लिए विमान सेवा है। खजुराहो से 170 कि.मी. और ग्वालियर से 119 मीटर दूर झांसी रेलवे स्टेशन है। झांसी जंक्शन के लिए देश के प्रमुख शहरों से रेलगाड़ियां चलती हैं। झांसी-खजुराहो पर स्थित ओरछा के लिए बस सेवा भी उपलब्ध है।