परस्परस्य मर्माणि थे भाषन्ते का अर्थ (शब्दार्थ विमर्श) | Chankya Niti Hindi Explanation - Daily Hindi Paper | RPSC Online GK in Hindi | GK in Hindi l RPSC Notes in Hindi

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गुरुवार, 8 सितंबर 2022

परस्परस्य मर्माणि थे भाषन्ते का अर्थ (शब्दार्थ विमर्श) | Chankya Niti Hindi Explanation

परस्परस्य मर्माणि थे भाषन्ते का अर्थ (शब्दार्थ विमर्श),  Chankya Niti Hindi Explanation  

परस्परस्य मर्माणि थे भाषन्ते का अर्थ (शब्दार्थ विमर्श) | Chankya Niti Hindi Explanation




परस्परस्य मर्माणि थे भाषन्ते नराधमाः । 
तएव विलयं यान्ति वल्मीकोदरसर्पवत् ॥ ॥ अध्याय 9 श्लोक - 21

 

शब्दार्थ - 

जो नीच मनुष्य एक-दूसरे के मर्मों को विदीर्ण करने वालेअन्तरात्मा को दुःखदायक वचनों को बौलते हैंवे निश्चय ही ऐसे नष्ट हो जाते हैं जैसे बांबी में फँसकर सांप नष्ट हो जाता है। भावार्थ-जो नीच पुरुष एक-दूसरे के प्रति अन्तरात्मा को दुःखदायकमर्मों को आहत पीड़ित) करने वाले वचन बोलते हैंवे ऐसे ही नष्ट हो जाते हैंजैसे बांबी में फँसकर सांप मारा जाता है । 

विमर्श - 

वाणी का घाव वाण के घाव से भी भयंकर होता है।