JIO के गेहूं के पैकेट वाली भ्रामक वायरल पोस्ट का फैक्ट चेक. - Daily Hindi Paper | RPSC Online GK in Hindi | GK in Hindi l RPSC Notes in Hindi

Breaking

शनिवार, 26 दिसंबर 2020

JIO के गेहूं के पैकेट वाली भ्रामक वायरल पोस्ट का फैक्ट चेक.

JIO के गेहूं के पैकेट वाली वायरल पोस्ट का फैक्ट चेक.


दिल्ली बॉर्डर में तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसानों के आंदोलन के बीच  सोशल मीडिया पोस्ट जिसमे गेहूं के पैकेट जिनमें जिओ (Jio) का लोगो(logo) लगा हुआ है बहुत तेजी से वायरल हो रही है.



 ऐसी ही एक फोटो फेसबुक में 3000 से ज्यादा बार शेयर की गई है जिसे एनएसयूआई (NSUI) के सोशल मीडिया प्रेसिडेंट मनोज लुबाना  ने भी शेयर किया है,  



सोशल मीडिया पर इन फोटो के द्वारा  दावा किया जा रहा है कि रिलायंस द्वारा  नये कृषि कानून बन जाने के बाद गेहूँ का तेजी से भंडारण करना चालू कर दिया है जिससे आने वाले समय में  गेहूं के दाम आसमान छूने लगेंगे.


फैक्ट  चेक 

इन वायरल फोटो के फैक्ट चेक करने पर यह पाया गया कि जो फोटो शेयर की जा रही है उनका रिलायंस जिओ (JIO) से कोई संबंध नहीं है, लोगो में यूज़ किया गया फॉण्ट  रिलायंस जिओ के फॉण्ट  से बिल्कुल अलग है,  रिलायंस इंडस्ट्रीज के अनुसार जिओ डिजिटल सेवाओं तक सिमित है.

हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ यूजर ने कुछ और फोटो शेयर किया है जिसमे जिओ (JIO) दाल का पैकेट शेयर किया है जिसमे इस लोगो वाली कंपनी का नाम Nikhil Pulses Pvt Ltd  लिखा है.



इसी तरह की एक कंपनी ‘राधाकृष्ण ट्रेडिंग कंपनी’ के मालिक भरत भाई ने  बताया कि वे एक अनाज व्यापारी हैं और जो व्यापारी उन्हें अनाज बेचते हैं वे ‘जियो बेस्ट शरबती गेहूं’ के प्रिंट वाली ऐसी बोरियों में कई तरह के अनाज की पैकेजिंग करते हैं. भरत भाई के मुताबिक, “गुजरात में जियो के लोगो वाली बोरियों में अनाज भरकर बेचने का चलन पिछले कई सालों से है. कई बार जिस बोरी पर गेहूं लिखा होता है, उसमें व्यापारी चावल, बाजरा या दाल भरकर भी बेच देते हैं. जियो के लोगो की वजह से ये बोरियां देखने में आकर्षक लगती हैं और इनमें अनाज बेचने से बिक्री भी अच्छी होती है. इन बोरियों को बनाने वाली कोई एक कंपनी नहीं है. ऐसी बोरियां कई कंपनियां बनाती हैं.”


इस तरह हमने हमारी जांच में पाया कि सोशल मीडिया पर रिलायंस जिओ (JIO)  के नाम से वायरल पोस्ट का रिलायंस जियो से कोई संबंध नहीं है और उसके साथ किए जा रहे दावे गलत हैं