चाणक्य नीति के अनुसार जीवन में सफलता कौन प्राप्त करता है |चाणक्य नीति संस्कृत दोहे और उनका अर्थ | Chankya Niti - Daily Hindi Paper | RPSC Online GK in Hindi | GK in Hindi l RPSC Notes in Hindi

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गुरुवार, 10 जून 2021

चाणक्य नीति के अनुसार जीवन में सफलता कौन प्राप्त करता है |चाणक्य नीति संस्कृत दोहे और उनका अर्थ | Chankya Niti

चाणक्य नीति संस्कृत दोहे और उनका अर्थ 

चाणक्य नीति के अनुसार जीवन मेंसफलता कौन प्राप्त करता है  |चाणक्य नीति संस्कृत दोहे और उनका अर्थ  | Chankya Niti



निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत् ।

खगा वीताफलं वृक्षं भुक्त्वा चाऽभ्यागता गृहम्॥

 

 शब्दार्थ- 


वारांगना धनरहित मनुष्य को, प्रजा पराजित अथवा शक्तिहीन राजा को त्याग देती है। पक्षीगण फलरहित वृक्ष को और अतिथि लोग भोजन करके घर को त्याग देते हैं।

 

भावार्थ-

वेश्या निर्धन मनुष्य को, प्रजा पराजित राजा को, पक्षी फलरहित वृक्ष को और अतिथि भोजन करके घर को छोड़ देते हैं। 


विमर्श-

चाणक्य नीति के अनुसार जीवन में सफलता कौन प्राप्त करता है 

सुसम्पन्न व्यक्ति ही जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं ।