स्किन टू स्किन टच मामला : उच्चतम न्यायालय में सुनवायी पूरी, फैसला सुरक्षित। Skin to Skin Touch - Daily Hindi Paper | RPSC Online GK in Hindi | GK in Hindi l RPSC Notes in Hindi

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गुरुवार, 30 सितंबर 2021

स्किन टू स्किन टच मामला : उच्चतम न्यायालय में सुनवायी पूरी, फैसला सुरक्षित। Skin to Skin Touch

 स्किन टू स्किन टच मामला : उच्चतम न्यायालय में सुनवायी पूरी, फैसला सुरक्षित

स्किन टू स्किन टच मामला : उच्चतम न्यायालय में सुनवायी पूरी, फैसला सुरक्षित। Skin to Skin Touch



नयी दिल्ली, 30 सितंबर 


 उच्चतम न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के एक मामले में ‘स्किन टू स्किन टच’ पर बॉम्बे उच्च न्यायालय के फैसले को पलटने की मांग संबंधी याचिकाओं पर सुनवायी पूरी होने के बाद गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।


न्यायमूर्ति यू.यू. ललित की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल, महाराष्ट्र सरकार एवं राष्ट्रीय महिला आयोग और अन्य पक्षकारों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा।


उच्च न्यायालय ने 19 जनवरी के अपने फैसले में कहा था कि आरोपी एवं पीड़िता का ‘स्किन टू स्किन टच’ नहीं होने की स्थिति यौन अपराध के मामले में पोक्सो अधिनियम के तहत नहीं आती है। अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल, महाराष्ट्र सरकार एवं राष्ट्रीय महिला आयोग और अन्य ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल की थी।

न्यायमूर्ति यू.यू. ललित, न्यायमूर्ति रवीन्द्र भट और न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी की पीठ के समक्ष सुनवायी के दौरान अपनी दलीलें देते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि उच्च न्यायालय के फैसले में पोक्सो अधिनियम की धारा सात की गलत व्याख्या की गई है। उच्च न्यायालय के फैसले से ऐसा लगता है यदि कोई व्यक्ति सर्जिकल दस्ताने पहनकर एक महिला के पूरे शरीर को उसकी इच्छी के विपरीत छूता है तो उसे यौन उत्पीड़न के लिए दंड नहीं दिया जाएगा।


शीर्ष अदालत में सुनवायी के दौरान अटॉर्नी जनरल ने विभिन्न तर्कों के आधार पर कहा था कि उच्च न्यायालय के इस फैसले का दूरगामी खतरनाक परिणाम सामने आने की आशंका है।

बॉम्बे उच्च न्यायालय के 19 जनवरी के फैसले पर शीर्ष अदालत ने 27 जनवरी को रोक लगा दी थी।