बाघों की मृत्यु सरकार का स्पष्टीकरण । Government's explanation for the death of tigers - Daily Hindi Paper | RPSC Online GK in Hindi | GK in Hindi l RPSC Notes in Hindi

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शुक्रवार, 31 दिसंबर 2021

बाघों की मृत्यु सरकार का स्पष्टीकरण । Government's explanation for the death of tigers

 

बाघों की मृत्यु सरकार का  स्पष्टीकरण । Government's explanation for the death of tigers


बाघों की मृत्यु पर भारत सरकार का जवाब 


मीडिया में आई कुछ रिपोर्ट्स में वर्ष 2021 के दौरान हुई बाघों की मौत की खबर को इस तरह से उजागर किया गया है, जो एक तरह से देश में बाघ संरक्षण के बारे में एकतरफा दृष्टिकोण को दर्शाता है।

 

हालांकि इस बात की सराहना की जाती है कि इन रिपोर्टों में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों का उपयोग किया गया है, लेकिन जिस तरह से इस विवरण को प्रस्तुत किया गया है, वह चेतावनी देने का कारण बनता है और यह भारत सरकार द्वारा निरंतर तकनीकी एवं वित्तीय हस्तक्षेपों के परिणामस्वरूप देश में बाघों की मृत्यु से निपटने तथा बाघ संरक्षण में किए गए प्राकृतिक लाभ के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं की सीमा को महत्व नहीं देता है।


भारतीय बाघ गणना के अनुसार बाघों की संख्या में वृद्धि 

भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रयासों के परिणामस्वरूप बाघों को विलुप्त होने की कगार से लेकर उनकी संख्या में वृद्धि के एक सुनिश्चित पथ पर ले जाया गया है, जो वर्ष 2006, 2010, 2014 और 2018 में प्रत्येक चौथे वर्ष आयोजित होने वाले अखिल भारतीय बाघ गणना के निष्कर्षों में स्पष्ट हुआ है। इन परिणामों में बाघों की सकारात्मक वार्षिक वृद्धि दर 6% पर दर्शाई गई है, जिससे प्राकृतिक रूप से हुए नुकसान की पूर्ति स्पष्ट होती है और भारत के संदर्भ में यह पता चलता है कि बाघों को विचरण के लिए विस्तारित स्तर पर रहने वाले आवास उपलब्ध होते हैं।

 

वर्ष 2012 से 2021 की अवधि के मध्य यह देखा जा सकता है कि देश में प्रति वर्ष बाघों की औसत मृत्यु 98 के आसपास है, जो सुदृढ़ वृद्धि दर द्वारा दर्शाई गई बाघों की संख्या में वार्षिक बढ़ोत्तरी द्वारा संतुलित हुई है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने अवैध शिकार पर काबू पाने के लिए प्रोजेक्ट टाइगर की चल रही केंद्र प्रायोजित योजना के तहत कई कदम उठाए हैं, परिणामस्वरूप अवैध शिकार को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है, जैसा कि पुष्ट हुए अवैध शिकार और जब्ती के मामलों में देखा गया है।

 

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण अपनी वेबसाइट के साथ-साथ अपने पोर्टल - www.tigernet.nic.in के माध्यम से नागरिकों को बाघों की मृत्यु के आंकड़े उपलब्ध कराने में पारदर्शिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखता है, ताकि लोग चाहें तो इनका तार्किक मूल्यांकन कर सकें।

 

समाचार रिपोर्टों में यह बताया गया है कि बाघों की मौत के 126 मामलों में से 60 बाघों की मृत्यु शिकारियों, दुर्घटनाओं तथा संरक्षित क्षेत्रों के बाहर मानव-पशु संघर्ष के कारण हुई थी, जबकि बाघों की मौत होने का कारण बताने की प्रक्रिया में अनदेखी की गई थी।

 

इसके आलोक में, यहां पर इस बात का उल्लेख करना आवश्यक है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की एक समर्पित मानक संचालन प्रक्रिया के माध्यम से किसी बाघ की मौत होने का कारण बताने के लिए एक सख्त प्रोटोकॉल है, जिसे अप्राकृतिक माना जाता है, जब तक कि संबंधित राज्य द्वारा नेक्रोप्सी रिपोर्ट, हिस्टोपैथोलॉजिकल और फोरेंसिक आकलन के अलावा तस्वीरों तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को प्रस्तुत करके साबित नहीं किया जाता है। इन दस्तावेजों के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही टाइगर रिजर्व के बाहर 60 बाघों की मौत के कारणों का पता लगाया जा सकता है।

 

यह आशा व्यक्त की जाती है कि मीडिया, देश को उपरोक्त तथ्यों से अवगत कराएगा ताकि कोई सनसनी न फैलने पाये और नागरिकों को यह विश्वास न हो कि यह चिंता का कोई कारण है।