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बुधवार, 16 मार्च 2022

कल्पना चावला जीवन परिचय | Kalpana Chawla Short Biography in Hindi

कल्पना चावला जीवन परिचय

(Kalpana Chawla Short Biography in Hindi) 


कल्पना चावला जीवन परिचय | Kalpana Chawla Short Biography in Hindi


कल्पना चावला जीवन परिचय (Kalpana Chawla Short Biography in Hindi)

  • जन्म 17 मार्च 1962
  • मृत्यु 1 फरवरी 2003


करनाल में बनारसी लाल चावला के घर 17 मार्च 1962 को जन्मीं कल्पना अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। प्यार से  घर में सभी उन्हें मोंटू कहते थे। शुरुआती पढ़ाई करनाल के टैगोर बाल निकेतन में हुई। जब 8वीं कक्षा में पहुंचीं तो अपने पिता से उन्होंने इंजीनियर बनने की इच्छा जाहिर की। हालांकि उनके पिता उन्हें डॉक्टर या टीचर बनाना चाहते थे, लेकिन कल्पना बचपन से ही उड़ने का सपना देखा करतीं थीं, इसीलिए पिता ने उनकी बात टाली नहीं।


घर वालों के सपोर्ट से कल्पना ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की और इसके बाद अपने सपनों को साकार करने के लिए साल 1982 में वे अमेरिका चली गईं। अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई के लिए 1988 में वो नासा अनुसंधान के साथ जुड़ीं और 1991 में उन्हें अमेरिका की नागरिकता मिल गई। कल्पना चावला का पहला अंतरिक्ष सफ़र 1997 के साल में शुरू हुआ। वो 5 एस्ट्रोनॉट साथियों के साथ इस मिशन पर गईं थी। 10.4 मिलियन माइल्स का सफर तय करते हुए उन्होंने पृथ्वी के 252 चक्कर काटे और इस तरह पहला मिशन सफल रहा था। ये मिशन एसटीएस 87 कोलंबिया शटल से पूरा किया गया था। 


साल 2003 में कोलंबिया शटल से ही कल्पना ने अंतरिक्ष के लिए अपनी दूसरी उड़ान भरी। हालांकि कोलंबिया शटल की यह 28वीं उड़ान थी। मिशन लांच होने की तारीख तय की गई 16 जनवरी 2003 और पृथ्वी पर वापस आने के लिए तारीख थी 1 फरवरी 2003। सब कुछ तय कर लिया गया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। हुआ यूँ कि उड़ान भरने के तुरंत बाद इस मिशन में खराबी आ गई। एक्सटर्नल टैंक से शटल को जोड़ने वाला फ़ोम टूट गया था। ये बार-बार स्पेस शटल के लेफ़्ट विंग से टकराने लगा। 1 फरवरी 2003 को धरती पर वापस आने के क्रम में यह यान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया। कल्पना चावला समेत इस अंतरिक्ष यान में मौजूद सभी सातों अंतरिक्ष यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे वाले स्पेसक्राफ़्ट के मलबे को ढूंढने में कई हफ्ते लग गए थे, क्योंकि ये मलबा 2000 वर्ग मील के इलाके में बिखरा हुआ था। नासा को कुल 84,000 टुकड़े मिले। फिर भी ये पूरे स्पेसक्राफ्ट का 40 प्रतिशत ही था। पहले और दूसरे स्पेस मिशन को मिलाकर कल्पना ने स्पेस में कुल 30 दिन, 14 घंटे और 54 मिनट बिताए थे।

कल्पना की शादी जीन पीएर हैरिसन से 1983 में हुआ। वह उड़ान प्रशिक्षक और विमानन लेखक थे। कल्पना को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं, जिनमें कॉन्ग्रेशनल अंतरिक्ष पदक सम्मान, नासा अंतरिक्ष उड़ान पदक और नासा विशिष्ट सेवा पदक शामिल हैं। वो एक बार नहीं बल्कि दो बार अंतरिक्ष में जाने वाली भारत में जन्मी पहली महिला थीं। 1 फरवरी 2003 को हुए उस हादसे बाद अगले दो सालों तक किसी भी स्पेस शटल को अंतरिक्ष में नहीं भेजा गया। 2011 में स्पेस शटल प्रोग्राम को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। आज कल्पना हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन कुछ लोग मरने के बाद भी मुद्दतों याद किए जाते हैं और कल्पना चावला का नाम भी ऐसे ही लोगों में शुमार होता है। देश की इस बेटी को हमने अपने दिलों में आज भी जिंदा रखा है। आज भी वो हमारे लिए एक मिसाल हैं और हमेशा रहेंगी।