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बुधवार, 4 मई 2022

मालचा महल का इतिहास | Malcha Mahal Ka Itihaas Fact

 मालचा महल का इतिहास Malcha Mahal Ka Itihaas

मालचा महल का इतिहास | Malcha Mahal Ka Itihaas Fact

मालचा महल का इतिहास  (Malcha Mahal Ka Itihaas Fact in Hindi)

1325 ईस्वी में तत्कालीन सुल्तान फिरोज शाह तुगलक द्वारा इसका निर्माण कराया गया तथा लंबे समय तक इसका उपयोग हंटिंग लॉज (Hunting Lodge) के रूप में किया गया।

बाद में यह अवध के नवाब के वंशजों का निवास स्थान बन गया। 

ऐसा माना जाता है कि अवध की बेगम विलायत महल के नाम पर इसे 'विलायत महल' कहा जाने लगा, उन्होंने दावा किया कि वह अवध के शाही परिवार की सदस्य थीं। उन्हें वर्ष 1985 में सरकार द्वारा महल का स्वामित्व प्रदान किया गया था।

वर्ष 1993 में बेगम द्वारा आत्महत्या करने के बाद मालचा महल उनकी बेटी सकीना महल और बेटे राजकुमार अली रज़ा (साइरस) के स्वामित्व में आ गया। वर्ष 2017 में राजकुमार की मृत्यु हो गई तथा उनकी मृत्यु से कुछ वर्ष पहले उनकी बहन का देहांत हो चुका था।


फिरोज शाह तुगलक कौन था इसकी जानकारी 

इसका जन्म 1309 ईस्वी में हुआ था और अपने चचेरे भाई मुहम्मद-बिन-तुगलक के निधन के बाद यह दिल्ली की गद्दी पर बैठा था।

यह तुगलक वंश का तीसरा शासक था जिसने 1320 ईस्वी से 1412 ईस्वी तक दिल्ली पर शासन किया था। मुहम्मद-बिन-तुगलक 1351ईस्वी से 1388 ईस्वी तक सत्ता में रहा।

इसने ही जजिया कर लगाने की शुरुआत की थी।

जजिया' या 'जीज्या' का तात्पर्य राज्य के सार्वजनिक व्यय हेतु निधि प्रदान करने के लिये इस्लामी कानून द्वारा शासित राज्य के स्थायी गैर-मुस्लिम विषयों पर वित्तीय प्रभार के रूप में प्रति व्यक्ति वार्षिक कराधान से है।

इसने  सशस्त्र बलों में उत्तराधिकार के सिद्धांत को  लागू किया जहाँ अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद अपने बच्चों को उस स्थान पर सेना में भेजने की अनुमति थी। हालांँकि उन्हें भुगतान,  वास्तविक मुद्रा की बजाय ज़मीन के रूप में किया जाता था।

अंग्रेज़ों द्वारा उसे 'सिंचाई विभाग का जनक' कहकर संबोधित किया गया क्योंकि उसने कई बगीचे और नहरों का निर्माण करवाया था।


तुगलक वंश की जानकारी 

तुगलक वंश तुर्क मूल के मुस्लिम परिवार से संबंधित था। मुहम्मद-बिन-तुगलक द्वारा सैन्य अभियान का नेतृत्व किये जाने के परिणामस्वरुप 1330-1335 ईस्वी के बीच यह राजवंश अपने चर्मोत्कर्ष पर पहुँच  गया।

इसका शासन यातना, क्रूरता और विद्रोहों द्वारा चिह्नित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप 1335 ईस्वी के बाद इस वंश की क्षेत्रीय पहुँच का तेज़ी से विघटन हुआ।

तुगलक वंश में तीन महत्त्वपूर्ण शासक थे- गयासुद्दीन तुगलक (1320-1325 ईस्वी), मुहम्मद-बिन- तुगलक (1325-1351 ईस्वी) और फिरोज शाह तुगलक (1351 से 1388 ईस्वी)।

गयासुद्दीन तुगलक इस वंश का संस्थापक था।