चाण्डालानां सहस्त्रे च का अर्थ (शब्दार्थ भावार्थ)| Chankya Niti Sanskrit Hindi Explanation - Daily Hindi Paper | RPSC Online GK in Hindi | GK in Hindi l RPSC Notes in Hindi

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शनिवार, 27 अगस्त 2022

चाण्डालानां सहस्त्रे च का अर्थ (शब्दार्थ भावार्थ)| Chankya Niti Sanskrit Hindi Explanation

 चाण्डालानां सहस्त्रे च का अर्थ (शब्दार्थ भावार्थ)

चाण्डालानां सहस्त्रे च का अर्थ (शब्दार्थ भावार्थ)| Chankya Niti Sanskrit Hindi Explanation


चाण्डालानां सहस्त्रे च सूरिभिस्तत्त्वदर्शिभिः । 
एको हि यवनः प्रोक्तो न नीचो यवनात् परः॥ ॥ अध्याय-8 श्लोक - 511

 

शब्दार्थ - 

तत्वदर्शी विद्वानों के द्वारा कहा गया है कि एक सहस्र चाण्डालों के समान एक यवन ही होता हैयवन से बढ़कर दूसरा कोई नीच नहीं है ।

 

भावार्थ-

तत्वदर्शी विद्वानों का कथन है कि एक यवन का सहस्र चाण्डालों के समान होता हैयवन से बढ़कर नीच कोई नहीं होता ।

 

विमर्श-

यवन से बढ़कर संसार में कोई और बड़ा नीच नहीं ।