निर्विषेणाऽपि सर्पेण कर्तव्या शब्दार्थ भावार्थ | Chankya Niti Ke Anusaar Shaktihin - Daily Hindi Paper | RPSC Online GK in Hindi | GK in Hindi l RPSC Notes in Hindi

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शनिवार, 10 सितंबर 2022

निर्विषेणाऽपि सर्पेण कर्तव्या शब्दार्थ भावार्थ | Chankya Niti Ke Anusaar Shaktihin

  निर्विषेणाऽपि सर्पेण कर्तव्या शब्दार्थ भावार्थ 

निर्विषेणाऽपि सर्पेण कर्तव्या शब्दार्थ भावार्थ | Chankya Niti Ke Anusaar Shaktihin



निर्विषेणाऽपि सर्पेण कर्तव्या शब्दार्थ भावार्थ 

निर्विषेणाऽपि सर्पेण कर्तव्या महती फणा । 
विषमस्तु न चाप्यस्तु घटाटोपो भयङ्करः ॥

 

शब्दार्थ - विषहीन सर्प के द्वारा भी अपना बड़ा भारी फन फैलाना चाहिएउसमें विष हो अथवा न हो आडम्बर भयंकर होता है ।

 

भावार्थ - विषहीन सांप को भी अपना बड़ा फन फैलाना चाहिएउसमें विष है या नहींइस बात को कौन जानता हैहाँ आडम्बर से दूसरे लोग भयभीत अवश्य हो जाते हैं।

 

विमर्श - आचार्य चाणक्य कहते हैं कि शक्तिहीन होने पर भी मनुष्य को शक्तिशाली होने का अवश्य दिखावा करना चाहिए अन्यथा उसे कष्ट पहुंचाने लगेंगे ।