चाणक्य के अनुसार शत्रु से कैसा व्यवहार करना चाहिए | Enemy Behaviour According Chankya - Daily Hindi Paper | RPSC Online GK in Hindi | GK in Hindi l RPSC Notes in Hindi

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शुक्रवार, 16 सितंबर 2022

चाणक्य के अनुसार शत्रु से कैसा व्यवहार करना चाहिए | Enemy Behaviour According Chankya

 चाणक्य के अनुसार शत्रु से कैसा व्यवहार करना चाहिए

चाणक्य के अनुसार शत्रु से कैसा व्यवहार करना चाहिए | Enemy Behaviour According Chankya

चाणक्य के अनुसार शत्रु से कैसा व्यवहार करना चाहिए

यस्य चाप्रियमिच्छेत तस्य ब्रूयात् सदा प्रियम् । 
व्याधो मृगवधं कर्तुं गीतं गायति सुस्वरम् ॥ ॥ अध्याय-14 श्लोक -1011

 

शब्दार्थ - 

निश्चय ही जिसका अप्रियमबुरा करने की चाहनाइच्छा हो उसके साथ सर्वदा मधुर बोलना चाहिएजैसे शिकारी हिरन का वध करने के लिए मधुर स्वर में गीत गाता है। 


भावार्थ-

जिसका अप्रिय करने की इच्छा हो उससे सदा मधुर भाषण करना चाहिएजैसे शिकारी हिरण का शिकार करने के लिए पहले मधुर स्वर में गीत गाता है ( और जब गीत के स्वर पर मस्त होकर हिरन निकट आ जाता हैतब उसे पकड़ लेता है)। 

विमर्श - 

जिसका अप्रिय करने की इच्छा हो उसके साथ मधुर व्यवहारमधुर आलाप आदि करके उसे अपने वश में कर लेना चाहिए और समय पाकर उसका नाश कर डालना चाहिए । जब तक समय अपने अनुकूल न हो तब तक शत्रु को अपने कन्धे पर ढा चाहिएउसका आदर-सत्कार करना चाहिएपरन्तु जब समय अपने अनुकूल आ जाए तब उसे उसी प्रकार नष्ट कर दें जैसे घड़े को पत्थर पर पटककर फोड़ डालते हैं ।