संज्ञान और संवेग Cognition Notes
भाग–1 : संज्ञान की मूल अवधारणा
प्रश्न 1. संज्ञान (Cognition) से मुख्यतः क्या तात्पर्य है?
A. केवल
याद करना
B. मानसिक प्रक्रियाओं द्वारा ज्ञान का ग्रहण, संगठन
और उपयोग
C. केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति
D. केवल शारीरिक विकास
उत्तर: B
व्याख्या:
संज्ञान
व्यक्ति की उन मानसिक प्रक्रियाओं का समूह है जिनके द्वारा वह जानकारी
को ग्रहण करता है, उसका अर्थ समझता है, उसे
व्यवस्थित करता है, याद रखता है और समस्या-समाधान में उसका
उपयोग करता है। इसमें ध्यान, प्रत्यक्षीकरण, स्मृति, चिंतन, तर्क, भाषा, निर्णय
और समस्या-समाधान जैसी प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
CTET में संज्ञान को केवल "ज्ञान" तक सीमित नहीं माना
जाता, बल्कि ज्ञान
के निर्माण और उसके उपयोग की मानसिक प्रक्रिया के
रूप में देखा जाता है।
प्रश्न 2. निम्न में से कौन-सी संज्ञानात्मक
प्रक्रिया है?
A. चिंतन
B. पसीना आना
C. हृदय गति
D. शारीरिक वृद्धि
उत्तर: A
व्याख्या:
चिंतन
एक उच्च स्तरीय संज्ञानात्मक प्रक्रिया है। बच्चा किसी समस्या पर विचार करता है, विभिन्न
विकल्पों की तुलना करता है और निष्कर्ष तक पहुँचता है।
संज्ञानात्मक
प्रक्रियाओं में सामान्यतः ध्यान, स्मृति, भाषा, चिंतन, तर्क, निर्णय, कल्पना
और समस्या-समाधान शामिल होते हैं।
प्रश्न 3. बच्चा किसी गणितीय समस्या को हल करने
के लिए विभिन्न तरीकों की तुलना करता है। यह किसका उदाहरण है?
A. संवेग
B. संज्ञानात्मक प्रक्रिया
C. शारीरिक विकास
D. सामाजिक परिपक्वता
उत्तर: B
व्याख्या:
विभिन्न
समाधान विधियों की तुलना करना, उनके परिणामों पर विचार करना और उपयुक्त
तरीका चुनना चिंतन
एवं समस्या-समाधान की प्रक्रिया है। ये संज्ञानात्मक
प्रक्रियाएँ हैं।
ऐसे
प्रश्नों में CTET सामान्यतः
यह जाँचता है कि अभ्यर्थी बच्चे के व्यवहार के पीछे सक्रिय मानसिक प्रक्रिया पहचान
सकता है या नहीं।
प्रश्न 4. संज्ञानात्मक विकास का संबंध मुख्यतः
किससे है?
A. केवल
शरीर के आकार से
B. सोचने और समझने की क्षमताओं के विकास से
C. केवल भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से
D. केवल सामाजिक नियमों से
उत्तर: B
व्याख्या:
संज्ञानात्मक
विकास में बच्चे की सोच, तर्क, स्मृति, भाषा, समस्या-समाधान, अवधारणा
निर्माण और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
पियाजे
ने संज्ञानात्मक विकास को विशेष रूप से बच्चे के सक्रिय अनुभवों और वातावरण के साथ
अंतःक्रिया से जोड़ा।
प्रश्न 5. निम्न में से कौन-सा कथन संज्ञान के
बारे में सबसे उपयुक्त है?
A. संज्ञान
केवल जन्मजात होता है।
B. संज्ञान केवल विद्यालय में विकसित होता है।
C. संज्ञान अनुभव, अंतःक्रिया और मानसिक गतिविधियों से
विकसित होता है।
D. संज्ञान का सीखने से कोई संबंध नहीं है।
उत्तर: C
व्याख्या:
बच्चा
अपने अनुभवों, वातावरण, भाषा, सामाजिक
अंतःक्रिया और समस्याओं से सीखते हुए अपनी संज्ञानात्मक क्षमताओं का विकास करता
है।
इसलिए
शिक्षक को केवल जानकारी देने के बजाय बच्चों को सोचने, प्रश्न
पूछने, खोज
करने और तर्क करने के अवसर देने चाहिए।
भाग–2 : संज्ञान और अधिगम
प्रश्न 6. अधिगम में संज्ञान की भूमिका क्या है?
A. कोई
भूमिका नहीं
B. जानकारी को समझने और उसका अर्थ बनाने में सहायता
C. केवल शारीरिक गतिविधि
D. केवल अनुशासन बनाए रखना
उत्तर: B
व्याख्या:
अधिगम
केवल जानकारी सुन लेने का नाम नहीं है। विद्यार्थी नई जानकारी को अपने पूर्व ज्ञान
से जोड़ता है, उसका
अर्थ समझता है और आवश्यकता पड़ने पर उसका प्रयोग करता है। इन सभी में संज्ञानात्मक
प्रक्रियाएँ महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 7. यदि शिक्षक बच्चों से पूछता है—“तुम ऐसा क्यों सोचते हो?” तो वह मुख्यतः किस क्षमता को बढ़ावा दे
रहा है?
A. रटने
की क्षमता
B. चिंतन एवं तर्क
C. शारीरिक क्षमता
D. अनुकरण
उत्तर: B
व्याख्या:
“क्यों”
जैसे
प्रश्न बच्चों को अपने उत्तर के पीछे कारण बताने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे तार्किक
चिंतन, विश्लेषण
और अभिव्यक्ति विकसित होती है।
CTET की दृष्टि से ऐसा शिक्षण अधिक प्रभावी है जिसमें बच्चे केवल
उत्तर नहीं बताते बल्कि उत्तर का औचित्य भी समझाते हैं।
प्रश्न 8. बच्चों को किसी समस्या के एक से अधिक
समाधान खोजने देना किसका उदाहरण है?
A. संज्ञानात्मक
सक्रियता
B. दंड
C. निष्क्रिय अधिगम
D. केवल अनुकरण
उत्तर: A
व्याख्या:
एक
समस्या के अनेक समाधान खोजने में बच्चा तुलना, विश्लेषण, कल्पना और तर्क का प्रयोग करता है। इससे divergent thinking यानी
अपसारी चिंतन को बढ़ावा मिलता है।
शिक्षक
को ऐसे प्रश्न देने चाहिए जिनमें केवल एक यांत्रिक उत्तर के बजाय सोचने की
आवश्यकता हो।
प्रश्न 9. “बच्चा ज्ञान का सक्रिय निर्माता है”—यह विचार किस दृष्टिकोण से संबंधित है?
A. रचनावादी
दृष्टिकोण
B. केवल व्यवहारवाद
C. केवल परिपक्वतावाद
D. दंडात्मक दृष्टिकोण
उत्तर: A
व्याख्या:
रचनावाद
के अनुसार विद्यार्थी निष्क्रिय रूप से ज्ञान ग्रहण नहीं करता। वह अपने पूर्व
अनुभव, ज्ञान
और सामाजिक अंतःक्रियाओं के आधार पर ज्ञान का निर्माण करता है।
इसलिए
शिक्षक की भूमिका केवल व्याख्यान देने वाले व्यक्ति की नहीं बल्कि facilitator यानी
सीखने में सहायता करने वाले की होती है।
प्रश्न 10. संज्ञानात्मक विकास में पूर्व ज्ञान
क्यों महत्वपूर्ण है?
A. क्योंकि
बच्चा नई जानकारी को पूर्व ज्ञान से जोड़ता है।
B. क्योंकि पुराना ज्ञान हमेशा सही होता है।
C. क्योंकि नई जानकारी की आवश्यकता नहीं होती।
D. क्योंकि शिक्षक को पढ़ाना नहीं पड़ता।
उत्तर: A
व्याख्या:
बच्चा
नई अवधारणा को समझते समय अक्सर अपने पहले से मौजूद ज्ञान और अनुभव का उपयोग करता
है। यदि पूर्व धारणा गलत या अधूरी है, तो शिक्षक को उसे पहचानकर उचित
अनुभव और उदाहरणों के माध्यम से पुनर्गठित करने
में मदद करनी चाहिए।
भाग–3 : संवेग
की अवधारणा
प्रश्न 11. संवेग (Emotion) क्या है?
A. केवल
बुद्धि
B. व्यक्ति की भावात्मक एवं मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया
C. केवल स्मृति
D. केवल शारीरिक वृद्धि
उत्तर: B
व्याख्या:
संवेग
किसी परिस्थिति, व्यक्ति
या घटना के प्रति व्यक्ति की भावात्मक प्रतिक्रिया है।
जैसे खुशी, भय, क्रोध, दुःख, आश्चर्य
आदि।
संवेग
में केवल भावना ही नहीं बल्कि शारीरिक और व्यवहारात्मक प्रतिक्रियाएँ भी जुड़ी हो
सकती हैं।
प्रश्न 12. निम्न में से कौन संवेग का उदाहरण है?
A. भय
B. लंबाई
C. स्मृति
D. गणना
उत्तर: A
व्याख्या:
भय
एक प्रमुख संवेग है। इसी प्रकार खुशी, क्रोध, दुःख, आश्चर्य आदि भावात्मक अवस्थाएँ भी संवेग
के उदाहरण हैं।
CTET में संवेग और संज्ञान को अलग-अलग पहचानने की क्षमता महत्वपूर्ण
है।
प्रश्न 13. बच्चे के सीखने में संवेग क्यों
महत्वपूर्ण हैं?
A. संवेग
सीखने को प्रभावित नहीं करते।
B. संवेग ध्यान, प्रेरणा और सहभागिता को प्रभावित कर
सकते हैं।
C. केवल बुद्धि सीखने को प्रभावित करती है।
D. केवल पाठ्यपुस्तक सीखने को प्रभावित करती है।
उत्तर: B
व्याख्या:
बच्चा
यदि सुरक्षित, स्वीकार्य
और उत्साहित महसूस करता है तो वह सीखने की गतिविधियों में अधिक सक्रिय रूप से भाग
ले सकता है। इसके विपरीत अत्यधिक भय या चिंता ध्यान
और सहभागिता को बाधित कर सकती है।
इसलिए
प्रभावी कक्षा में शिक्षक को सकारात्मक भावनात्मक वातावरण बनाना चाहिए।
प्रश्न 14. परीक्षा के समय अत्यधिक भय का बच्चे के
सीखने पर क्या प्रभाव हो सकता है?
A. हमेशा
सकारात्मक प्रभाव
B. ध्यान और प्रदर्शन में बाधा
C. बुद्धि में अचानक वृद्धि
D. स्मृति का हमेशा पूर्ण विकास
उत्तर: B
व्याख्या:
उचित
स्तर की चुनौती बच्चे को प्रेरित कर सकती है, लेकिन अत्यधिक भय या चिंता उसकी एकाग्रता, कार्यशील
स्मृति और समस्या-समाधान को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए
शिक्षक को भय आधारित मूल्यांकन के बजाय सहयोगी और रचनात्मक वातावरण बनाना चाहिए।
प्रश्न 15. भावनात्मक रूप से सुरक्षित कक्षा की
प्रमुख विशेषता क्या है?
A. गलती
पर अपमान
B. प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता
C. निरंतर दंड
D. विद्यार्थियों की तुलना
उत्तर: B
व्याख्या:
सुरक्षित
कक्षा में विद्यार्थी बिना अपमान के प्रश्न पूछ सकता है, अपनी
कठिनाई बता सकता है और गलती से सीख सकता है।
CTET के अनुसार त्रुटि को सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा मानना
बाल-केंद्रित शिक्षण की महत्वपूर्ण विशेषता है।
भाग–4 : संज्ञान
और संवेग का संबंध
प्रश्न 16. संज्ञान और संवेग के बारे में कौन-सा
कथन सही है?
A. दोनों
पूरी तरह अलग हैं।
B. संवेग संज्ञान को प्रभावित कर सकते हैं और संज्ञान संवेग को
प्रभावित कर सकता है।
C. केवल संज्ञान महत्वपूर्ण है।
D. केवल संवेग महत्वपूर्ण है।
उत्तर: B
व्याख्या:
मानव
व्यवहार में संज्ञान और संवेग परस्पर जुड़े हैं। उदाहरण के लिए, किसी
कठिन प्रश्न को देखकर बच्चा “मैं यह नहीं कर सकता” सोचता
है तो उसमें चिंता उत्पन्न हो सकती है। दूसरी ओर चिंता उसकी समस्या-समाधान क्षमता
को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए
शिक्षा में cognitive और
emotional
दोनों पक्षों पर
ध्यान आवश्यक है।
प्रश्न 17. बच्चा गलत उत्तर देने से डरता है और
इसलिए उत्तर देने की कोशिश नहीं करता। यह किस संबंध को दर्शाता है?
A. संवेग
का संज्ञानात्मक व्यवहार पर प्रभाव
B. केवल शारीरिक विकास
C. केवल भाषा विकास
D. संवेग का कोई प्रभाव नहीं
उत्तर: A
व्याख्या:
गलत
होने का भय एक भावनात्मक स्थिति है जो बच्चे के आत्मविश्वास, सहभागिता
और सोचने की स्वतंत्रता को प्रभावित कर रही है।
शिक्षक
को ऐसी स्थिति में बच्चे को आश्वस्त करना चाहिए कि गलती सीखने की प्रक्रिया का
सामान्य हिस्सा है।
प्रश्न 18. सकारात्मक संवेग का अधिगम में क्या
योगदान हो सकता है?
A. सहभागिता
और प्रेरणा बढ़ाना
B. हमेशा सीखना रोकना
C. स्मृति समाप्त करना
D. सोचने की क्षमता कम करना
उत्तर: A
व्याख्या:
रुचि, उत्साह
और उपलब्धि की भावना बच्चे को सीखने में सक्रिय बना सकती है। सकारात्मक भावनात्मक
वातावरण प्रेरणा
और कक्षा सहभागिता को बढ़ा सकता है।
प्रश्न 19. शिक्षक बच्चे के उत्तर को गलत बताकर
उसका मजाक उड़ाता है। इससे क्या समस्या उत्पन्न हो सकती है?
A. भावनात्मक
असुरक्षा
B. संज्ञानात्मक क्षमता में तुरंत वृद्धि
C. सीखने की गति हमेशा बढ़ना
D. आत्मविश्वास बढ़ना
उत्तर: A
व्याख्या:
सार्वजनिक
अपमान से बच्चा भविष्य में उत्तर देने, प्रश्न पूछने या अपनी कठिनाई व्यक्त
करने से बच सकता है।
एक
अच्छे शिक्षक को व्यक्ति को नहीं बल्कि उत्तर या रणनीति को सुधारना चाहिए।
प्रश्न 20.
“गलती सीखने का
अवसर है”—इस विचार का संज्ञान और संवेग दोनों से
क्या संबंध है?
A. इससे
बच्चे को सोचने और बिना भय के प्रयास करने का अवसर मिलता है।
B. इससे केवल अनुशासन बढ़ता है।
C. इसका कोई शैक्षिक महत्व नहीं है।
D. इससे रटने की क्षमता बढ़ती है।
उत्तर: A
व्याख्या:
गलती
का विश्लेषण संज्ञानात्मक विकास में सहायता करता है, जबकि गलती को स्वीकार करने वाला वातावरण
भावनात्मक सुरक्षा देता है।
इस
प्रकार त्रुटि
विश्लेषण + भावनात्मक सुरक्षा दोनों प्रभावी अधिगम के लिए उपयोगी हैं।
भाग–5 : पियाजे
और संज्ञानात्मक विकास
प्रश्न 21. पियाजे के अनुसार बच्चा ज्ञान का
निर्माण कैसे करता है?
A. केवल
शिक्षक के भाषण से
B. वातावरण के साथ सक्रिय अंतःक्रिया द्वारा
C. केवल रटकर
D. केवल पुरस्कार द्वारा
उत्तर: B
व्याख्या:
पियाजे
के अनुसार बच्चा अपने वातावरण के साथ सक्रिय रूप से अंतःक्रिया करता है और अनुभवों
के आधार पर मानसिक संरचनाएँ विकसित करता है।
इसीलिए
पियाजे का दृष्टिकोण बाल-केंद्रित और सक्रिय अधिगम की
ओर संकेत करता है।
प्रश्न 22. पियाजे की संज्ञानात्मक विकास की पहली
अवस्था कौन-सी है?
A. औपचारिक
संक्रियात्मक
B. पूर्व-संक्रियात्मक
C. संवेदी-गामक
D. मूर्त-संक्रियात्मक
उत्तर: C
व्याख्या:
पियाजे
ने चार प्रमुख अवस्थाएँ बताईं:
1.
संवेदी-गामक — जन्म
से लगभग 2 वर्ष
2.
पूर्व-संक्रियात्मक — लगभग
2–7 वर्ष
3.
मूर्त-संक्रियात्मक — लगभग
7–11 वर्ष
4.
औपचारिक-संक्रियात्मक — लगभग
11 वर्ष
के बाद
आयु सीमाएँ कठोर नहीं मानी जानी चाहिए; विकास
में व्यक्तिगत भिन्नताएँ हो सकती हैं।
प्रश्न 23. वस्तु स्थायित्व (Object Permanence) किस अवस्था से विशेष रूप से संबंधित है?
A. संवेदी-गामक
B. पूर्व-संक्रियात्मक
C. मूर्त-संक्रियात्मक
D. औपचारिक-संक्रियात्मक
उत्तर: A
व्याख्या:
वस्तु
स्थायित्व का अर्थ है कि बच्चा यह समझने लगता है कि कोई वस्तु दिखाई न देने पर भी
अस्तित्व में रहती है। यह उपलब्धि संवेदी-गामक अवस्था से
संबंधित है।
प्रश्न 24. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में बच्चा
किस प्रवृत्ति का प्रदर्शन कर सकता है?
A. अहंकेन्द्रिता
B. पूर्ण वैज्ञानिक तर्क
C. अमूर्त तर्क की पूर्ण क्षमता
D. सभी दृष्टिकोणों को समान रूप से समझना
उत्तर: A
व्याख्या:
पियाजे
के अनुसार पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में बच्चे में egocentrism यानी
अहंकेन्द्रिता दिखाई दे सकती है। इसका अर्थ स्वार्थी
होना नहीं है। इसका अर्थ है कि बच्चे को दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण को समझने में
कठिनाई हो सकती है।
प्रश्न 25. मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था में बच्चा
किस प्रकार के चिंतन में अधिक सक्षम होता है?
A. ठोस
वस्तुओं और घटनाओं पर तार्किक चिंतन
B. केवल काल्पनिक चिंतन
C. कोई तार्किक चिंतन नहीं
D. केवल अनुकरण
उत्तर: A
व्याख्या:
मूर्त-संक्रियात्मक
अवस्था में बच्चे ठोस वस्तुओं और वास्तविक परिस्थितियों पर तार्किक रूप से विचार
कर सकते हैं।
इसलिए
इस स्तर पर वस्तुओं, चित्रों, मॉडल
और वास्तविक उदाहरणों का प्रयोग प्रभावी हो सकता है।
प्रश्न 26. संरक्षण (Conservation) की अवधारणा मुख्यतः किस अवस्था से
जुड़ी है?
A. संवेदी-गामक
B. पूर्व-संक्रियात्मक
C. मूर्त-संक्रियात्मक
D. जन्मपूर्व
उत्तर: C
व्याख्या:
संरक्षण
का अर्थ है यह समझना कि किसी वस्तु का रूप बदलने पर उसकी मात्रा आवश्यक रूप से
नहीं बदलती। उदाहरण के लिए समान मात्रा के पानी को अलग आकार के पात्र में डालने पर
उसकी मात्रा समान रह सकती है। यह समझ मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था में
विकसित होती है।
प्रश्न 27. औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था की प्रमुख
विशेषता क्या है?
A. अमूर्त
और परिकल्पनात्मक चिंतन
B. केवल इंद्रिय अनुभव
C. केवल अनुकरण
D. केवल शारीरिक क्रिया
उत्तर: A
व्याख्या:
इस
अवस्था में किशोर अधिक अमूर्त, तार्किक
और परिकल्पनात्मक चिंतन करने में सक्षम होते हैं। वे “यदि
ऐसा हो तो क्या होगा?” जैसी
परिस्थितियों पर विचार कर सकते हैं।
प्रश्न 28. पियाजे के अनुसार Assimilation का अर्थ क्या है?
A. नई
जानकारी को मौजूदा मानसिक schema
में
समाहित करना
B. पुराने schema को हमेशा नष्ट करना
C. जानकारी भूलना
D. केवल नकल करना
उत्तर: A
व्याख्या:
Assimilation में बच्चा नए अनुभव को अपने मौजूदा
मानसिक ढाँचे या schema के
आधार पर समझने का प्रयास करता है।
उदाहरण:
बच्चा चार पैरों वाले किसी नए जानवर को पहले से ज्ञात “कुत्ता” schema से
समझने का प्रयास करता है।
प्रश्न 29.
Accommodation का
अर्थ क्या है?
A. मौजूदा
schema में
आवश्यक परिवर्तन करना
B. केवल याद करना
C. किसी जानकारी को भूल जाना
D. केवल अनुकरण करना
उत्तर: A
व्याख्या:
जब
नया अनुभव पुराने schema से
पूरी तरह मेल नहीं खाता, तो
बच्चा अपने मानसिक ढाँचे में संशोधन करता है। इसे Accommodation कहते
हैं।
उदाहरण
के लिए बच्चा समझता है कि चार पैर वाला हर जानवर कुत्ता नहीं होता।
प्रश्न 30.
Assimilation और Accommodation किस व्यापक प्रक्रिया से संबंधित हैं?
A.
Adaptation
B. Punishment
C. Conditioning
D. Maturation only
उत्तर: A
व्याख्या:
पियाजे
के अनुसार बच्चा वातावरण के अनुकूल होने के लिए assimilation और
accommodation दोनों
प्रक्रियाओं का उपयोग करता है। इनका समन्वय अनुकूलन (Adaptation) में
सहायता करता है।
भाग–6 : वाइगोत्स्की
और सामाजिक-संज्ञान
प्रश्न 31. वाइगोत्स्की के अनुसार संज्ञानात्मक
विकास में किसका विशेष महत्व है?
A. सामाजिक
अंतःक्रिया
B. केवल जैविक परिपक्वता
C. केवल दंड
D. केवल अकेला अध्ययन
उत्तर: A
व्याख्या:
वाइगोत्स्की
ने संज्ञानात्मक विकास को सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ से जोड़ा। बच्चे अधिक
सक्षम व्यक्तियों, साथियों
और भाषा के माध्यम से सीखते हैं।
इसलिए सामाजिक
अंतःक्रिया और सहयोगात्मक अधिगम महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 32.
ZPD का
पूरा नाम क्या है?
A.
Zone of Personal Development
B. Zone of Proximal Development
C. Zone of Physical Development
D. Zone of Primary Development
उत्तर: B
व्याख्या:
ZPD यानी निकटस्थ विकास का क्षेत्र वह
अंतर है जो बच्चा अकेले क्या कर सकता है और सक्षम व्यक्ति की सहायता से क्या कर
सकता है, इनके
बीच होता है।
शिक्षक
को बच्चे की वर्तमान क्षमता से थोड़ा आगे की गतिविधियाँ उचित सहायता के साथ देनी
चाहिए।
प्रश्न 33.
Scaffolding का
अर्थ क्या है?
A. बच्चे
को स्थायी रूप से उत्तर बता देना
B. आवश्यकता के अनुसार अस्थायी सहायता देना
C. बच्चे को अकेला छोड़ देना
D. दंड देना
उत्तर: B
व्याख्या:
Scaffolding में शिक्षक या अधिक सक्षम साथी बच्चे को
ऐसी सहायता देता है जिससे वह वह कार्य कर सके जो अभी अकेले नहीं कर पा रहा। क्षमता
बढ़ने पर सहायता धीरे-धीरे कम कर दी जाती है।
यह स्वतंत्र
अधिगम को
बढ़ावा देता है।
प्रश्न 34. वाइगोत्स्की के अनुसार भाषा का
संज्ञानात्मक विकास में क्या महत्व है?
A. भाषा
केवल संचार का माध्यम है।
B. भाषा विचार और मानसिक विकास का महत्वपूर्ण साधन है।
C. भाषा का चिंतन से कोई संबंध नहीं।
D. भाषा केवल परीक्षा के लिए है।
उत्तर: B
व्याख्या:
वाइगोत्स्की
ने भाषा को विचारों के विकास और आत्म-नियमन से जोड़ा। बच्चा स्वयं से बात करते हुए
किसी कार्य की योजना बना सकता है और अपने व्यवहार को नियंत्रित कर सकता है।
प्रश्न 35. सहयोगात्मक अधिगम संज्ञानात्मक विकास
में कैसे सहायक है?
A. विद्यार्थी
विचारों का आदान-प्रदान करते हैं।
B. विद्यार्थी हमेशा चुप रहते हैं।
C. शिक्षक की भूमिका समाप्त हो जाती है।
D. केवल रटने को बढ़ावा मिलता है।
उत्तर: A
व्याख्या:
साथियों
के साथ चर्चा करने से विद्यार्थी विभिन्न दृष्टिकोण सुनते हैं, अपने
विचार स्पष्ट करते हैं और तर्क प्रस्तुत करते हैं। इससे सामाजिक
एवं संज्ञानात्मक दोनों विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
भाग–7 : संवेगात्मक
विकास
प्रश्न 36. संवेगात्मक विकास से क्या तात्पर्य है?
A. भावनाओं
को पहचानने, व्यक्त
करने और नियंत्रित करने की क्षमता का विकास
B. केवल शारीरिक विकास
C. केवल स्मृति विकास
D. केवल भाषा विकास
उत्तर: A
व्याख्या:
संवेगात्मक
विकास में बच्चा धीरे-धीरे अपनी भावनाओं को पहचानना, उनका उचित ढंग से प्रदर्शन करना और
परिस्थितियों के अनुसार उन्हें नियंत्रित करना सीखता है।
यह
सामाजिक संबंधों और विद्यालयी समायोजन में भी महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 37. भावनात्मक आत्म-नियमन का उदाहरण क्या
है?
A. क्रोध
में तुरंत किसी को चोट पहुँचाना
B. क्रोध आने पर रुककर शांत होने का प्रयास करना
C. हर भावना को दबाना
D. दूसरों को दोष देना
उत्तर: B
व्याख्या:
आत्म-नियमन
का अर्थ भावनाओं को समाप्त करना नहीं है। इसका अर्थ है भावनाओं को पहचानकर उचित
प्रतिक्रिया का चयन करना।
शिक्षक
बच्चों को गहरी साँस लेना,
कुछ
समय रुकना, अपनी
भावना शब्दों में व्यक्त करना और समस्या पर चर्चा करना सिखा सकता है।
प्रश्न 38. शिक्षक बच्चों को अपनी भावनाएँ व्यक्त
करने का अवसर क्यों दे?
A. इससे
भावनात्मक समझ और संचार विकसित होता है।
B. इससे पढ़ाई समाप्त हो जाती है।
C. इससे अनुशासन हमेशा खत्म हो जाता है।
D. इसका कोई लाभ नहीं।
उत्तर: A
व्याख्या:
जब
बच्चे अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करते हैं तो वे भावनात्मक
शब्दावली, आत्म-जागरूकता
और संचार कौशल विकसित करते हैं।
शिक्षक
को भावनाओं को स्वीकार करना चाहिए, लेकिन अनुचित व्यवहार को उचित तरीके से
सीमित करना चाहिए।
प्रश्न 39. निम्न में से कौन भावनात्मक परिपक्वता
का संकेत है?
A. हर
स्थिति में भावनाएँ दबाना
B. परिस्थिति के अनुसार भावनाओं की उचित अभिव्यक्ति
C. हमेशा क्रोधित रहना
D. दूसरों की भावनाओं को न समझना
उत्तर: B
व्याख्या:
भावनात्मक
परिपक्वता का अर्थ भावनाओं को दबाना नहीं है। व्यक्ति अपनी भावनाओं को पहचानता है
और परिस्थिति के अनुरूप उचित तरीके से व्यक्त एवं नियंत्रित करता
है।
प्रश्न 40. सहानुभूति (Empathy) का अर्थ है—
A. दूसरे
की भावनाओं और दृष्टिकोण को समझने का प्रयास
B. हमेशा दूसरे से सहमत होना
C. दूसरे का मजाक उड़ाना
D. अपनी भावनाएँ छिपाना
उत्तर: A
व्याख्या:
सहानुभूति
का अर्थ दूसरे व्यक्ति की स्थिति और भावनाओं को समझने का प्रयास करना है। शिक्षक
में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण होने पर वह बच्चे के व्यवहार के पीछे के कारणों को
बेहतर समझ सकता है।
भाग–8 : बुद्धि,
संज्ञान और संवेग
प्रश्न 41. क्या उच्च IQ होने का अर्थ यह है कि बच्चा हर
परिस्थिति में सफल होगा?
A. हाँ, हमेशा
B. नहीं
C. केवल परीक्षा में
D. केवल गणित में
उत्तर: B
व्याख्या:
बौद्धिक
क्षमता महत्वपूर्ण है, लेकिन
बच्चे का प्रदर्शन कई कारकों से प्रभावित होता है—प्रेरणा, रुचि, भावनात्मक
स्थिति, सामाजिक
वातावरण, अवसर, स्वास्थ्य
और शिक्षण की गुणवत्ता आदि।
इसलिए
किसी एक परीक्षण के आधार पर बच्चे की संपूर्ण क्षमता तय करना उचित नहीं है।
प्रश्न 42. भावनात्मक बुद्धिमत्ता का संबंध
मुख्यतः किससे है?
A. अपनी
और दूसरों की भावनाओं को पहचानने और प्रबंधित करने से
B. केवल गणितीय क्षमता से
C. केवल स्मृति से
D. केवल IQ
से
उत्तर: A
व्याख्या:
भावनात्मक
बुद्धिमत्ता में अपनी भावनाओं की पहचान, उनका नियमन, दूसरों
की भावनाओं को समझना और सामाजिक परिस्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया देना शामिल
है।
प्रश्न 43. शिक्षक यदि बच्चे की भावनात्मक स्थिति
को समझकर शिक्षण रणनीति बदलता है, तो
यह किस दृष्टिकोण को दर्शाता है?
A. समग्र
दृष्टिकोण
B. केवल दंडात्मक दृष्टिकोण
C. केवल रटने का दृष्टिकोण
D. केवल परीक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण
उत्तर: A
व्याख्या:
समग्र
शिक्षा में बच्चे को केवल संज्ञानात्मक इकाई नहीं माना जाता। उसकी भावनात्मक, सामाजिक, भाषाई
और संज्ञानात्मक आवश्यकताओं को भी महत्व दिया जाता है।
भाग–9 : ध्यान,
स्मृति और संवेग
प्रश्न 44. अत्यधिक चिंता का ध्यान पर क्या प्रभाव
पड़ सकता है?
A. ध्यान
भंग हो सकता है।
B. ध्यान हमेशा बढ़ता है।
C. कोई प्रभाव नहीं।
D. स्मृति हमेशा दोगुनी हो जाती है।
उत्तर: A
व्याख्या:
जब
बच्चा अत्यधिक चिंता में होता है तो उसकी मानसिक ऊर्जा चिंता से संबंधित विचारों
में लग सकती है। इससे कार्य पर ध्यान केंद्रित करना कठिन हो सकता है।
इसलिए
शिक्षक को अनावश्यक भय और दबाव कम करना चाहिए।
प्रश्न 45. रुचि सीखने में किस प्रकार सहायता करती
है?
A. ध्यान
और सक्रिय सहभागिता बढ़ा सकती है।
B. सीखने को हमेशा रोकती है।
C. केवल शारीरिक विकास करती है।
D. इसका कोई संबंध नहीं।
उत्तर: A
व्याख्या:
जिस
विषय या गतिविधि में बच्चे की रुचि होती है, उसमें वह अधिक ध्यान और प्रयास कर सकता
है। इसलिए शिक्षण को बच्चों के अनुभवों, प्रश्नों और वास्तविक जीवन से जोड़ना
उपयोगी है।
प्रश्न 46. अर्थपूर्ण अधिगम स्मृति के लिए क्यों
उपयोगी है?
A. बच्चा
जानकारी को समझकर पूर्व ज्ञान से जोड़ता है।
B. बच्चा केवल शब्द दोहराता है।
C. समझ की आवश्यकता नहीं होती।
D. केवल परीक्षा तक जानकारी रहती है।
उत्तर: A
व्याख्या:
जब
जानकारी अर्थपूर्ण तरीके से सीखी जाती है तो विद्यार्थी उसे अपने पूर्व ज्ञान से
जोड़ता है। इससे जानकारी को समझना, याद
रखना और नई परिस्थिति में उपयोग करना आसान
हो सकता है।
प्रश्न 47. शिक्षक को बच्चों से केवल तथ्यों को
याद कराने के बजाय क्या करना चाहिए?
A. अवधारणाओं
को समझने और लागू करने के अवसर देने चाहिए।
B. केवल रटने पर जोर देना चाहिए।
C. केवल लिखवाना चाहिए।
D. केवल परीक्षा लेनी चाहिए।
उत्तर: A
व्याख्या:
CTET की बाल-केंद्रित दृष्टि में समझ, अनुप्रयोग, तर्क
और समस्या-समाधान को महत्त्व दिया जाता है। केवल रटना
गहरे अधिगम का पर्याप्त प्रमाण नहीं है।
भाग–10 : प्रेरणा
और संवेग
प्रश्न 48. आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation) का उदाहरण है—
A. केवल
पुरस्कार पाने के लिए पढ़ना
B. विषय में रुचि होने के कारण पढ़ना
C. दंड से बचने के लिए पढ़ना
D. डर के कारण पढ़ना
उत्तर: B
व्याख्या:
आंतरिक
प्रेरणा में व्यक्ति स्वयं कार्य में रुचि या संतुष्टि के कारण प्रयास करता है।
बाह्य
प्रेरणा में पुरस्कार, अंक, प्रशंसा
या दंड जैसे बाहरी कारण महत्वपूर्ण होते हैं।
प्रश्न 49. शिक्षक द्वारा हर सही उत्तर पर केवल
पुरस्कार देने से क्या समस्या हो सकती है?
A. बच्चा
केवल बाहरी पुरस्कार पर निर्भर हो सकता है।
B. बच्चा हमेशा आंतरिक रूप से प्रेरित होगा।
C. पुरस्कार का कोई प्रभाव नहीं।
D. संज्ञान समाप्त हो जाएगा।
उत्तर: A
व्याख्या:
पुरस्कार
उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन
यदि हर गतिविधि का मुख्य उद्देश्य पुरस्कार बन जाए तो बच्चे की आंतरिक
रुचि कमजोर
पड़ सकती है। इसलिए सीखने की संतुष्टि, जिज्ञासा और समझ को भी महत्व देना
चाहिए।
प्रश्न 50. सीखने के लिए सबसे उपयुक्त प्रेरक
वातावरण कौन-सा है?
A. भय
और अपमान
B. रुचि,
चुनौती, प्रोत्साहन
और स्वायत्तता
C. केवल पुरस्कार
D. केवल दंड
उत्तर: B
व्याख्या:
अच्छा
प्रेरक वातावरण बच्चों को चुनौती लेने, प्रश्न पूछने, विकल्प
चुनने और अपनी प्रगति देखने का अवसर देता है। इससे सीखने में सक्रिय भागीदारी
बढ़ती है।
भाग–11 : कक्षा-कक्ष
में संज्ञान और संवेग
प्रश्न 51. एक बच्चा बार-बार प्रश्न पूछता है।
शिक्षक को क्या करना चाहिए?
A. उसे
चुप करा देना
B. प्रश्नों को सीखने का अवसर मानना
C. उसे दंड देना
D. उसे कक्षा से बाहर भेजना
उत्तर: B
व्याख्या:
प्रश्न
पूछना जिज्ञासा
और संज्ञानात्मक सक्रियता का संकेत हो सकता है। शिक्षक को
प्रश्नों का उपयोग चर्चा और खोज आधारित अधिगम के लिए करना चाहिए।
प्रश्न 52. यदि विद्यार्थी शिक्षक के डर के कारण
प्रश्न नहीं पूछते, तो शिक्षक को—
A. डर
और बढ़ाना चाहिए
B. सुरक्षित एवं संवादात्मक वातावरण बनाना चाहिए
C. अधिक दंड देना चाहिए
D. प्रश्न पूछना बंद कर देना चाहिए
उत्तर: B
व्याख्या:
भावनात्मक
सुरक्षा संज्ञानात्मक सहभागिता के लिए महत्वपूर्ण है। जब बच्चा जानता है कि प्रश्न
पूछने पर उसका अपमान नहीं होगा, तो वह सीखने में अधिक सक्रिय हो सकता
है।
प्रश्न 53. कक्षा में हँसने-मजाक करने वाले बच्चे
को तुरंत “शरारती” घोषित करना—
A. हमेशा
उचित है
B. बच्चे के व्यवहार के कारणों की उपेक्षा कर सकता है
C. संज्ञानात्मक विकास बढ़ाता है
D. भावनात्मक सुरक्षा बढ़ाता है
उत्तर: B
व्याख्या:
शिक्षक
को व्यवहार के पीछे संभावित कारणों पर विचार करना चाहिए—क्या
बच्चा कार्य को समझ नहीं पा रहा, गतिविधि में रुचि नहीं है, ध्यान
की आवश्यकता है या कोई अन्य परिस्थिति है?
व्यवहार
को केवल लेबल करने के बजाय कारण समझना अधिक
उपयोगी है।
प्रश्न 54. एक विद्यार्थी कठिन कार्य देखकर कहता
है, “मैं नहीं कर सकता।” शिक्षक की सर्वोत्तम प्रतिक्रिया क्या
होगी?
A.
“तुम कभी नहीं कर सकते।”
B. “कोशिश मत करो।”
C. “चलो, इसे
छोटे चरणों में करते हैं।”
D. “दूसरे बच्चों से सीखो।”
उत्तर: C
व्याख्या:
कार्य
को छोटे चरणों में बाँटने से बच्चा सफलता का अनुभव कर सकता है। यह scaffolding और
सकारात्मक भावनात्मक समर्थन दोनों का उदाहरण है।
प्रश्न 55. बच्चे की आत्म-धारणा (Self-concept) सीखने को कैसे प्रभावित कर सकती है?
A. बच्चे
की अपनी क्षमता संबंधी धारणा उसके प्रयास और सहभागिता को प्रभावित कर सकती है।
B. इसका कोई प्रभाव नहीं।
C. केवल शिक्षक की बुद्धि महत्वपूर्ण है।
D. केवल पाठ्यपुस्तक महत्वपूर्ण है।
उत्तर: A
व्याख्या:
यदि
बच्चा स्वयं को सक्षम मानता है तो वह चुनौतीपूर्ण कार्यों में प्रयास करने के लिए
अधिक तैयार हो सकता है। यदि वह स्वयं को “कमजोर” मान लेता है तो वह प्रयास से बच सकता
है। इसलिए शिक्षक को लेबलिंग के बजाय विकासात्मक प्रतिक्रिया देनी
चाहिए।
भाग–12 : उच्च
स्तरीय चिंतन
प्रश्न 56. उच्च स्तरीय चिंतन का सर्वोत्तम उदाहरण
कौन-सा है?
A. परिभाषा
याद करना
B. किसी समस्या के कारणों का विश्लेषण करना
C. शब्द दोहराना
D. पाठ की नकल करना
उत्तर: B
व्याख्या:
विश्लेषण, मूल्यांकन, तुलना, निष्कर्ष
निकालना और नए समाधान बनाना उच्च स्तरीय संज्ञानात्मक गतिविधियाँ हैं। CTET में
ऐसे प्रश्नों के माध्यम से rote
learning बनाम meaningful learning का
अंतर पूछा जा सकता है।
प्रश्न 57.
“यदि पौधों को कई
दिनों तक प्रकाश न मिले तो क्या होगा? कारण
बताओ।” यह प्रश्न किसे बढ़ावा देता है?
A. केवल
स्मृति
B. अनुमान,
तर्क
और कारण-परिणाम संबंध
C. केवल अनुकरण
D. केवल लेखन
उत्तर: B
व्याख्या:
बच्चे
को परिस्थिति की कल्पना करनी है, संभावित परिणाम बताना है और कारण स्पष्ट
करना है। इसमें परिकल्पना, कारणात्मक
चिंतन और तर्क शामिल हैं।
प्रश्न 58. खुला प्रश्न (Open-ended question) बच्चों के संज्ञानात्मक विकास में
क्यों उपयोगी है?
A. इसमें
विभिन्न तर्कपूर्ण उत्तरों की संभावना हो सकती है।
B. इसमें हमेशा केवल हाँ/नहीं उत्तर होता है।
C. इसमें सोचने की आवश्यकता नहीं।
D. यह केवल रटने पर आधारित है।
उत्तर: A
व्याख्या:
खुले
प्रश्न बच्चों को अपने विचार स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने, कारण
देने और वैकल्पिक समाधान खोजने का अवसर देते हैं।
प्रश्न 59.
“तुम इस समस्या
को हल करने के लिए कौन-सी रणनीति चुनोगे और क्यों?” मुख्यतः किस क्षमता को मापता है?
A. रणनीतिक
चिंतन
B. केवल स्मृति
C. केवल हस्तलेखन
D. केवल अनुकरण
उत्तर: A
व्याख्या:
इस
प्रश्न में विद्यार्थी को केवल उत्तर नहीं देना है, बल्कि रणनीति
चुनने और उसके पीछे कारण बताने हैं। इससे metacognition और
reasoning का
आकलन किया जा सकता है।
प्रश्न 60.
Metacognition का
अर्थ क्या है?
A. अपने
सोचने और सीखने की प्रक्रिया के बारे में जागरूकता
B. केवल दूसरों की नकल
C. केवल याद करना
D. केवल भावनाएँ
उत्तर: A
व्याख्या:
Metacognition यानी अधिसंज्ञान में
व्यक्ति यह समझता है कि वह कैसे सीखता है, कौन-सी रणनीति उसके लिए उपयोगी है और
कहाँ उसे कठिनाई हो रही है।
उदाहरण:
“मुझे
यह याद रखने के लिए चित्र बनाना अधिक उपयोगी लगता है।”
भाग–13 : समस्या-समाधान
और संज्ञान
प्रश्न 61. समस्या-समाधान में पहला महत्वपूर्ण कदम
क्या हो सकता है?
A. समस्या
को समझना
B. तुरंत उत्तर लिखना
C. अनुमान लगाकर छोड़ देना
D. दूसरों की नकल करना
उत्तर: A
व्याख्या:
समस्या-समाधान
में पहले समस्या की प्रकृति और उपलब्ध जानकारी को समझना आवश्यक है। इसके बाद
रणनीति बनाना, उसे
लागू करना और परिणाम की जाँच करना उपयोगी चरण हैं।
प्रश्न 62. यदि बच्चा किसी गणितीय समस्या को चित्र
बनाकर हल करता है, तो यह—
A. वैकल्पिक
संज्ञानात्मक रणनीति का उदाहरण है।
B. गलत तरीका है।
C. केवल खेल है।
D. सीखने में बाधा है।
उत्तर: A
व्याख्या:
एक
ही समस्या को अलग-अलग विद्यार्थी अलग रणनीतियों से हल कर सकते हैं। शिक्षक को केवल
एक “मानक” विधि
पर जोर देने के बजाय विभिन्न प्रभावी रणनीतियों को
स्वीकार करना चाहिए।
प्रश्न 63. बच्चों को समस्या का समाधान स्वयं
खोजने देना किस प्रकार के अधिगम को बढ़ावा देता है?
A. सक्रिय
अधिगम
B. निष्क्रिय अधिगम
C. केवल रटने
D. केवल अनुकरण
उत्तर: A
व्याख्या:
जब
विद्यार्थी समस्या पर स्वयं विचार करते हैं, अनुमान लगाते हैं, परीक्षण
करते हैं और निष्कर्ष निकालते हैं तो वे सक्रिय रूप से सीखते हैं।
प्रश्न 64. शिक्षक किसी प्रश्न का उत्तर तुरंत
बताने के बजाय संकेत देता है। यह किसका उदाहरण है?
A.
Scaffolding
B. दंड
C. उपेक्षा
D. लेबलिंग
उत्तर: A
व्याख्या:
संकेत
विद्यार्थी को स्वयं उत्तर तक पहुँचने में मदद करता है। यह बच्चे की स्वतंत्र सोच
को बनाए रखते हुए आवश्यक सहायता प्रदान करता है।
भाग–14 : संवेग
और सामाजिक व्यवहार
प्रश्न 65. बच्चे में क्रोध का उचित प्रबंधन
विकसित करने के लिए शिक्षक को क्या करना चाहिए?
A. क्रोध
के लिए बच्चे को शर्मिंदा करना
B. भावनाओं को पहचानने और उचित अभिव्यक्ति की रणनीतियाँ सिखाना
C. हर बार दंड देना
D. बच्चे को हमेशा अनदेखा करना
उत्तर: B
व्याख्या:
क्रोध
एक मानवीय भावना है। शिक्षा का उद्देश्य भावना को समाप्त करना नहीं बल्कि बच्चे को भावना
की पहचान और उचित व्यवहार सीखने में सहायता करना है।
प्रश्न 66. भावनाओं को समझने में कहानी का उपयोग
क्यों प्रभावी हो सकता है?
A. बच्चे
पात्रों की परिस्थितियों और भावनाओं पर चर्चा कर सकते हैं।
B. कहानी का सीखने से कोई संबंध नहीं।
C. इससे केवल मनोरंजन होता है।
D. इससे संज्ञान कम होता है।
उत्तर: A
व्याख्या:
कहानियाँ
बच्चों को विभिन्न परिस्थितियों में पात्रों के विचारों और भावनाओं पर विचार करने
का अवसर देती हैं। इससे सहानुभूति, दृष्टिकोण
ग्रहण और भावनात्मक शब्दावली विकसित हो सकती है।
प्रश्न 67. सहपाठी द्वारा गलती करने पर उसका मजाक
उड़ाना किस बात का संकेत है?
A. सकारात्मक
भावनात्मक वातावरण
B. संवेदनशीलता विकसित करने की आवश्यकता
C. उच्च संज्ञानात्मक विकास
D. प्रभावी सहयोग
उत्तर: B
व्याख्या:
बच्चों
को दूसरों की भावनाओं और गरिमा का सम्मान करना सीखना चाहिए। शिक्षक को मजाक उड़ाने
के बजाय सम्मानजनक
संवाद और सहानुभूति विकसित करनी चाहिए।
प्रश्न 68. समूह कार्य में बच्चों को एक-दूसरे की
बात सुनना सिखाने से क्या विकसित हो सकता है?
A. सामाजिक
एवं भावनात्मक कौशल
B. केवल स्मृति
C. केवल शारीरिक शक्ति
D. केवल हस्तलेखन
उत्तर: A
व्याख्या:
दूसरों
को सुनना, अपनी
बात रखना, मतभेदों
पर चर्चा करना और सहयोग करना सामाजिक-भावनात्मक कौशल हैं। साथ ही ये संज्ञानात्मक
विकास में भी सहायता कर सकते हैं।
भाग–15 : शिक्षक
की भूमिका
प्रश्न 69. संज्ञानात्मक विकास के लिए शिक्षक की
सर्वोत्तम भूमिका क्या है?
A. केवल
व्याख्यान देना
B. बच्चों को सोचने, प्रश्न पूछने और समस्या हल करने के अवसर
देना
C. केवल उत्तर लिखवाना
D. केवल परीक्षा लेना
उत्तर: B
व्याख्या:
बाल-केंद्रित
शिक्षण में शिक्षक
facilitator की
भूमिका निभाता है। वह ऐसे अनुभव प्रदान करता है जिनसे बच्चे सक्रिय रूप से सोच
सकें और ज्ञान का निर्माण कर सकें।
प्रश्न 70. भावनात्मक विकास के लिए शिक्षक को—
A. सभी
भावनाओं को गलत कहना चाहिए।
B. बच्चों की भावनाओं को समझना और उचित अभिव्यक्ति सिखानी चाहिए।
C. केवल अंक पर ध्यान देना चाहिए।
D. बच्चों की तुलना करनी चाहिए।
उत्तर: B
व्याख्या:
शिक्षक
को बच्चे की भावनाओं को सुनना चाहिए, उन्हें मान्यता देनी चाहिए और सामाजिक
रूप से स्वीकार्य प्रतिक्रिया का मार्ग दिखाना चाहिए।
प्रश्न 71.
“तुम बहुत कमजोर
विद्यार्थी हो” कहना क्यों अनुचित है?
A. यह
स्थायी नकारात्मक लेबल बना सकता है।
B. इससे हमेशा प्रेरणा बढ़ती है।
C. इससे संज्ञानात्मक क्षमता बढ़ती है।
D. यह प्रभावी feedback है।
उत्तर: A
व्याख्या:
व्यक्ति
पर लेबल लगाने से बच्चा अपनी क्षमता को स्थायी मान सकता है। बेहतर feedback व्यवहार
या रणनीति पर होना चाहिए—जैसे, “इस
प्रश्न में तुम्हारी रणनीति को थोड़ा बदलकर देखते हैं।”
प्रश्न 72. प्रभावी feedback कैसा होना चाहिए?
A. अस्पष्ट
और अपमानजनक
B. विशिष्ट, रचनात्मक और सुधार की दिशा बताने वाला
C. केवल “गलत”
D. केवल अंक आधारित
उत्तर: B
व्याख्या:
अच्छा
feedback विद्यार्थी
को बताता है कि क्या
अच्छा हुआ,
कहाँ सुधार चाहिए और आगे क्या किया जा
सकता है।
इससे
संज्ञानात्मक और भावनात्मक दोनों स्तर पर सहायता मिलती है।
भाग–16 : समावेशी
कक्षा
प्रश्न 73. संज्ञानात्मक क्षमताओं में व्यक्तिगत
भिन्नताओं को शिक्षक को कैसे देखना चाहिए?
A. सभी
बच्चों से बिल्कुल समान गति की अपेक्षा करनी चाहिए।
B. अलग-अलग सीखने की गति और रणनीतियों को स्वीकार करना चाहिए।
C. धीमे बच्चों को अलग कर देना चाहिए।
D. केवल तेज बच्चों को अवसर देना चाहिए।
उत्तर: B
व्याख्या:
हर
बच्चा एक समान गति, शैली
या अनुभव से नहीं सीखता। शिक्षक को विभिन्न गतिविधियों, उदाहरणों
और सहायता के स्तर का उपयोग करना चाहिए।
प्रश्न 74. किसी बच्चे की संज्ञानात्मक कठिनाई का
समाधान करने का सर्वोत्तम तरीका क्या है?
A. उसे
कमजोर घोषित करना
B. कठिनाई की प्रकृति पहचानकर उपयुक्त सहायता देना
C. उसे कक्षा से बाहर करना
D. उसे दंड देना
उत्तर: B
व्याख्या:
पहले
यह समझना आवश्यक है कि बच्चे को कठिनाई किस चरण में और क्यों हो
रही है। उसके बाद उपयुक्त scaffolding,
अतिरिक्त
अभ्यास, वैकल्पिक
प्रस्तुति या peer support
दिया
जा सकता है।
प्रश्न 75. समावेशी कक्षा में भावनात्मक सुरक्षा
क्यों महत्वपूर्ण है?
A. इससे
बच्चे सहभागिता और सीखने में अधिक सहज महसूस कर सकते हैं।
B. इससे पाठ्यक्रम समाप्त हो जाता है।
C. इससे मूल्यांकन समाप्त हो जाता है।
D. इसका कोई महत्व नहीं।
उत्तर: A
व्याख्या:
समावेशी
वातावरण में प्रत्येक बच्चे को सम्मान और स्वीकार्यता का अनुभव होना चाहिए।
भावनात्मक सुरक्षा बच्चों को प्रश्न पूछने, प्रयास
करने और अपनी कठिनाइयाँ साझा करने में मदद करती है।
भाग–17 : आकलन
में संज्ञान
प्रश्न 76. केवल वस्तुनिष्ठ प्रश्नों से बच्चे की
संपूर्ण संज्ञानात्मक क्षमता का आकलन क्यों नहीं किया जा सकता?
A. क्योंकि
सभी संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ केवल सही/गलत उत्तर से नहीं मापी जा सकतीं।
B. क्योंकि वस्तुनिष्ठ प्रश्न कभी उपयोगी नहीं।
C. क्योंकि परीक्षा की आवश्यकता नहीं।
D. क्योंकि केवल मौखिक परीक्षा पर्याप्त है।
उत्तर: A
व्याख्या:
स्मृति
के अलावा विश्लेषण, रचनात्मकता, तर्क, समस्या-समाधान
और रणनीति जैसे पक्षों को देखने के लिए प्रोजेक्ट, चर्चा, प्रदर्शन, खुले
प्रश्न और अवलोकन जैसे विभिन्न तरीकों का उपयोग उपयोगी हो
सकता है।
प्रश्न 77.
Formative Assessment का उद्देश्य क्या है?
A. केवल
अंतिम अंक देना
B. सीखने के दौरान कठिनाइयों की पहचान करके सुधार करना
C. केवल विद्यार्थियों को रैंक देना
D. केवल असफल घोषित करना
उत्तर: B
व्याख्या:
रचनात्मक/निर्माणात्मक
आकलन सीखने की प्रक्रिया के दौरान feedback प्रदान करता है। इससे शिक्षक यह समझ
सकता है कि बच्चे को कहाँ कठिनाई है और आगे किस प्रकार की सहायता आवश्यक है।
प्रश्न 78. यदि बच्चा गलत उत्तर देता है, तो शिक्षक को सबसे पहले क्या करना
चाहिए?
A. उसे
डाँटना
B. उसके सोचने की प्रक्रिया समझने का प्रयास करना
C. उसे तुरंत शून्य देना
D. उसे कक्षा से निकालना
उत्तर: B
व्याख्या:
गलत
उत्तर बच्चे की सोच के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है। शिक्षक पूछ सकता
है—“तुमने
यह उत्तर कैसे सोचा?” इससे बच्चे की वैकल्पिक अवधारणा या reasoning समझने
में मदद मिलती है।
प्रश्न 79.
“तुमने यह उत्तर
कैसे प्राप्त किया?” किस प्रकार का प्रश्न है?
A. प्रक्रिया
और चिंतन जानने वाला प्रश्न
B. केवल स्मृति प्रश्न
C. केवल अनुशासनात्मक प्रश्न
D. केवल भावनात्मक प्रश्न
उत्तर: A
व्याख्या:
यह
प्रश्न बच्चे की thinking process जानने
का अवसर देता है। शिक्षक केवल सही उत्तर में रुचि न लेकर बच्चे द्वारा अपनाई गई
रणनीति और तर्क को समझ सकता है।
प्रश्न 80.
Portfolio किस
प्रकार के आकलन में उपयोगी हो सकता है?
A. बच्चे
की समय के साथ प्रगति देखने में
B. केवल एक दिन का प्रदर्शन देखने में
C. केवल IQ
मापने
में
D. केवल शारीरिक क्षमता मापने में
उत्तर: A
व्याख्या:
Portfolio में बच्चे के विभिन्न कार्यों का संग्रह
हो सकता है। इससे समय के साथ उसकी प्रगति, प्रयास, सुधार
और सीखने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलती है।
भाग–18 : CTET शैली के परिस्थिति-आधारित प्रश्न
प्रश्न 81. एक बच्चा विज्ञान के प्रश्न का गलत
उत्तर देता है, लेकिन उसका तर्क रोचक है। शिक्षक को
क्या करना चाहिए?
A. केवल
सही उत्तर बताना
B. उसके तर्क को सुनकर चर्चा कराना
C. बच्चे को रोक देना
D. उसे कम अंक देकर आगे बढ़ना
उत्तर: B
व्याख्या:
बच्चे
का तर्क उसकी वैकल्पिक अवधारणा के बारे में जानकारी दे सकता है। शिक्षक को उसे
व्यक्त करने का अवसर देना चाहिए और फिर अनुभव/प्रयोग/चर्चा के माध्यम से अवधारणा
स्पष्ट करनी चाहिए।
प्रश्न 82. एक विद्यार्थी समूह चर्चा में बोलने से
डरता है। शिक्षक को—
A. उसे
मजबूर करके सबके सामने बोलवाना चाहिए।
B. सुरक्षित छोटे समूह और धीरे-धीरे सहभागिता के अवसर देने चाहिए।
C. उसे हमेशा अनदेखा करना चाहिए।
D. उसे अंक नहीं देने चाहिए।
उत्तर: B
व्याख्या:
भावनात्मक
सुरक्षा बनाए रखते हुए सहभागिता धीरे-धीरे बढ़ाना उचित है। पहले जोड़ी में चर्चा, फिर
छोटे समूह और बाद में पूरे वर्ग में साझा करने का अवसर दिया जा सकता है।
प्रश्न 83. एक बच्चा कठिन गणितीय समस्या पर कई
प्रयास करता है और अलग-अलग रणनीतियाँ आजमाता है। यह किसका संकेत है?
A. संज्ञानात्मक
लचीलापन और समस्या-समाधान
B. अनुशासनहीनता
C. सीखने की अक्षमता
D. केवल अनुकरण
उत्तर: A
व्याख्या:
रणनीतियों
को बदलना और नए तरीकों को आजमाना cognitive
flexibility और
problem-solving का
संकेत हो सकता है। शिक्षक को ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
प्रश्न 84. बच्चा परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं
करता लेकिन चर्चा में बहुत अच्छे तर्क देता है। शिक्षक को क्या निष्कर्ष निकालना
चाहिए?
A. बच्चा
बुद्धिहीन है।
B. एक परीक्षा के आधार पर उसकी संपूर्ण क्षमता तय नहीं करनी
चाहिए।
C. उसे पढ़ाई से हटा देना चाहिए।
D. उसे हमेशा कम अंक देना चाहिए।
उत्तर: B
व्याख्या:
अलग-अलग
परिस्थितियों में बच्चे का प्रदर्शन अलग हो सकता है। इसलिए शिक्षक को विविध
आकलन विधियों से बच्चे की क्षमताओं को समझना चाहिए।
प्रश्न 85. एक बच्चा कहता है, “मुझसे कभी गणित नहीं होगा।” शिक्षक की सर्वोत्तम प्रतिक्रिया क्या
होगी?
A.
“हाँ, तुम
कमजोर हो।”
B. “तुम्हें गणित नहीं पढ़ना चाहिए।”
C. “अभी यह कठिन लग रहा है; हम इसे चरणों में समझते हैं।”
D. “दूसरों से तुलना करो।”
उत्तर: C
व्याख्या:
यह
प्रतिक्रिया बच्चे को विकासशील दृष्टिकोण (growth-oriented mindset) की
ओर ले जाती है। वर्तमान कठिनाई को स्थायी अक्षमता नहीं माना जाता।
भाग–19 : संज्ञानात्मक
रणनीतियाँ
प्रश्न 86.
Mind Map का
उपयोग किसमें सहायक हो सकता है?
A. विचारों
और अवधारणाओं को व्यवस्थित करने में
B. केवल अनुशासन में
C. केवल शारीरिक विकास में
D. केवल भावनाएँ दबाने में
उत्तर: A
व्याख्या:
Mind Map विभिन्न विचारों के बीच संबंधों को
दृश्य रूप में व्यवस्थित करता है। इससे संगठन, संबंध
निर्माण और पुनर्स्मरण में सहायता मिल सकती है।
प्रश्न 87. बच्चों को किसी विषय का सारांश स्वयं
बनाने देना किस क्षमता को बढ़ावा देता है?
A. समझ
और संगठन
B. केवल नकल
C. केवल अनुकरण
D. केवल शारीरिक कौशल
उत्तर: A
व्याख्या:
सारांश
बनाने के लिए बच्चे को मुख्य विचार पहचानना, महत्वपूर्ण और गौण जानकारी में अंतर
करना और विचारों को व्यवस्थित करना पड़ता है। ये महत्वपूर्ण संज्ञानात्मक कौशल
हैं।
प्रश्न 88. तुलना करना किस प्रकार की संज्ञानात्मक
प्रक्रिया है?
A. विश्लेषणात्मक
चिंतन
B. केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया
C. शारीरिक प्रक्रिया
D. केवल स्मृति
उत्तर: A
व्याख्या:
तुलना
में दो या अधिक वस्तुओं/विचारों की समानता और अंतर पहचाने जाते हैं। यह विश्लेषणात्मक
सोच का
महत्वपूर्ण भाग है।
प्रश्न 89. वर्गीकरण (Classification) का अर्थ है—
A. वस्तुओं
या विचारों को समान विशेषताओं के आधार पर समूहित करना
B. सबको अलग-अलग करना
C. केवल याद करना
D. केवल नकल करना
उत्तर: A
व्याख्या:
वर्गीकरण
में बच्चा वस्तुओं या अवधारणाओं की विशेषताओं को पहचानकर उन्हें उपयुक्त समूह में
रखता है। यह अवधारणा
निर्माण और तार्किक सोच में महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 90. कारण और परिणाम की पहचान करना किस
प्रकार के चिंतन से जुड़ा है?
A. तार्किक
चिंतन
B. केवल अनुकरण
C. केवल शारीरिक विकास
D. केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति
उत्तर: A
व्याख्या:
कारण-परिणाम
संबंध समझना बच्चे को घटनाओं के बीच तार्किक संबंध स्थापित करने में मदद करता है।
विज्ञान, सामाजिक
विज्ञान और दैनिक जीवन में यह कौशल अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भाग–20 : संज्ञान-संवेग
का समेकित दृष्टिकोण
प्रश्न 91. बच्चे के सीखने में “मन और भावना” को अलग-अलग देखना क्यों उचित नहीं है?
A. क्योंकि
संज्ञान और संवेग परस्पर प्रभावित हो सकते हैं।
B. क्योंकि केवल भावना महत्वपूर्ण है।
C. क्योंकि केवल संज्ञान महत्वपूर्ण है।
D. क्योंकि दोनों का सीखने से संबंध नहीं।
उत्तर: A
व्याख्या:
बच्चे
की भावनात्मक स्थिति उसके ध्यान, प्रेरणा और सहभागिता को प्रभावित कर
सकती है। वहीं किसी विषय को लेकर उसकी सोच उसकी भावनात्मक प्रतिक्रिया को प्रभावित
कर सकती है। इसलिए शिक्षा में समग्र दृष्टिकोण आवश्यक
है।
प्रश्न 92. एक शिक्षक कक्षा में बच्चों की रुचियों
को जानकर गतिविधियाँ बनाता है। इससे क्या लाभ हो सकता है?
A. संज्ञानात्मक
सहभागिता और प्रेरणा बढ़ सकती है।
B. केवल अनुशासन बढ़ता है।
C. सीखना रुक जाता है।
D. केवल भावनाएँ बढ़ती हैं।
उत्तर: A
व्याख्या:
रुचि
ध्यान और सक्रिय सहभागिता को बढ़ा सकती है। बच्चों के अनुभवों और रुचियों को
शिक्षण से जोड़ना सीखने को अधिक अर्थपूर्ण बना सकता है।
प्रश्न 93.
“मैं असफल हुआ
हूँ, लेकिन अगली बार अलग रणनीति अपनाऊँगा।” यह किसका उदाहरण है?
A. आत्म-नियमन
और metacognition
B. असहायता
C. केवल रटना
D. संज्ञानात्मक निष्क्रियता
उत्तर: A
व्याख्या:
बच्चा
अपनी पिछली रणनीति पर विचार कर रहा है और नई रणनीति की योजना बना रहा है। यह metacognitive awareness और
self-regulation का
उदाहरण है।
प्रश्न 94. बच्चे को अपनी सीखने की रणनीति चुनने
का अवसर देना किससे संबंधित है?
A. स्वायत्तता
B. दंड
C. भय
D. निष्क्रिय अधिगम
उत्तर: A
व्याख्या:
स्वायत्तता
का अर्थ है बच्चे को उचित सीमा के भीतर विकल्प और निर्णय लेने का अवसर देना। इससे जिम्मेदारी, आत्म-नियमन
और आंतरिक प्रेरणा को बढ़ावा मिल सकता है।
प्रश्न 95. शिक्षक कहता है, “गलत उत्तर देना कोई समस्या नहीं; हम देखेंगे कि गलती कहाँ हुई।” यह किस प्रकार का वातावरण बनाता है?
A. सीखने
के लिए सुरक्षित वातावरण
B. भय आधारित वातावरण
C. दंडात्मक वातावरण
D. प्रतियोगितात्मक भय
उत्तर: A
व्याख्या:
यह
संदेश बच्चे को बताता है कि गलती सीखने का सामान्य हिस्सा है। इससे बच्चे प्रश्न
पूछने और नए समाधान आजमाने में अधिक सहज हो सकते हैं।
प्रश्न 96. यदि बच्चा किसी कार्य में असफल होकर
प्रयास करना छोड़ देता है,
तो शिक्षक को
क्या करना चाहिए?
A. उसे
असफल घोषित करना
B. छोटे और प्राप्त करने योग्य चरणों में सहायता देना
C. उसका मजाक उड़ाना
D. उसे अन्य बच्चों से तुलना करना
उत्तर: B
व्याख्या:
छोटे
चरणों में कार्य बाँटना और उचित feedback देना बच्चे को सफलता के अनुभव प्रदान कर
सकता है। इससे उसकी self-efficacy
और motivation बढ़
सकती है।
प्रश्न 97.
CTET के
दृष्टिकोण से “अच्छा शिक्षक” कौन है?
A. जो
सभी उत्तर खुद बताता है।
B. जो बच्चों को सोचने, प्रश्न करने और सीखने के अवसर देता है।
C. जो सबसे अधिक गृहकार्य देता है।
D. जो सबसे कठोर दंड देता है।
उत्तर: B
व्याख्या:
CTET की बाल-केंद्रित दृष्टि में शिक्षक facilitator, मार्गदर्शक
और सीखने का सहायक है। वह बच्चों को सक्रिय भागीदारी, चर्चा, खोज
और चिंतन के अवसर देता है।
प्रश्न 98. निम्न में से कौन-सा संज्ञानात्मक और
संवेगात्मक विकास को एक साथ बढ़ावा देता है?
A. समूह
में समस्या-समाधान
B. केवल रटना
C. दंड
D. सार्वजनिक अपमान
उत्तर: A
व्याख्या:
समूह
में समस्या-समाधान से बच्चे तर्क और समस्या-समाधान करते हैं, साथ
ही सहयोग, सुनना, संवाद, सहानुभूति
और भावनात्मक नियंत्रण का अभ्यास करते हैं।
प्रश्न 99. यदि विद्यार्थी किसी विषय से डरता है, तो शिक्षक की सबसे उपयुक्त रणनीति क्या
होगी?
A. डर
को और बढ़ाना
B. सकारात्मक वातावरण में सरल से जटिल गतिविधियों की ओर बढ़ना
C. उसे विषय से हटा देना
D. उसकी तुलना अन्य विद्यार्थियों से करना
उत्तर: B
व्याख्या:
बच्चे
की वर्तमान समझ और भावनात्मक स्थिति को ध्यान में रखते हुए शिक्षण को क्रमबद्ध
करना चाहिए। सरल गतिविधियों में सफलता मिलने से बच्चा आगे कठिन कार्यों के लिए
तैयार हो सकता है।
प्रश्न 100.
संज्ञान और
संवेग पर आधारित CTET के लिए सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष क्या
है?
A. बच्चा
केवल बुद्धि से सीखता है।
B. बच्चा केवल भावनाओं से सीखता है।
C. सीखने में संज्ञानात्मक, भावनात्मक और सामाजिक पक्ष परस्पर जुड़े
होते हैं।
D. केवल परीक्षा अंक महत्वपूर्ण हैं।
उत्तर: C
व्याख्या:
बाल
विकास को समग्र रूप से समझना CTET के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बच्चा सोचता
है, महसूस
करता है, सामाजिक
संबंध बनाता है और अनुभवों से ज्ञान का निर्माण करता है।
इसलिए
शिक्षक को ऐसी कक्षा बनानी चाहिए जहाँ बच्चे को सुरक्षा, सम्मान, जिज्ञासा, चुनौती, सहयोग
और स्वतंत्र चिंतन के अवसर मिलें।