गायत्री मंत्र का अर्थ |गायत्री मंत्र के शब्दों की व्याख्या | Meaning and Explanation of Gayatri Mantra - Daily Hindi Paper | RPSC Online GK in Hindi | GK in Hindi l RPSC Notes in Hindi

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बुधवार, 9 जून 2021

गायत्री मंत्र का अर्थ |गायत्री मंत्र के शब्दों की व्याख्या | Meaning and Explanation of Gayatri Mantra

 गायत्री मंत्र का अर्थ |गायत्री मंत्र के शब्दों की व्याख्या

गायत्री मंत्र का अर्थ |गायत्री मंत्र के शब्दों की व्याख्या | Meaning and Explanation of Gayatri Mantra



गायत्री मंत्र

ऊं भुर्भुव: स्व: तत्स वितुर्वरेण्यं भर्गों देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात



गायत्री मंत्र का अर्थ 

ॐ भूर्भुवः स्वः

हे भगवन, आपने इंसान को जीवन दिया, उसके दुखों का नाश कर व सुख प्रदान करते हो.

तत्सवितुर्वरेण्यं

सूर्य की तरह उज्जवल व सर्वश्रेष्ठ

भर्गो देवस्यः धीमहि

हमारे कर्मो का उद्धार करें, प्रभु: हमें आत्म ध्यान के काबिल बनाएं.

धियो यो नः प्रचोदयात्

हमारी बुद्धि को प्रार्थना करने की शक्ति दे.


 गायत्री मंत्र को प्रार्थना के भाव  :-

हे भगवन, आप सभी के जीवन के करता-धर्ता है,

आप सबके जीवन के दुःख-दर्द का हाल निकालते है,

हमें सुख- शांति का रास्ता दिखने का उपकार करें.

हे श्रृष्टि के रचियता

कृपया आप हमें शक्ति व बुद्धि का सही रास्ता प्रदान कर हमारे जीवन को उज्जवल बनाए.

 

गायत्री मंत्र के शब्दों की व्याख्या

गायत्री मंत्र के पहले नौं शब्द प्रभु के गुणों की व्याख्या करते हैं


ॐ = प्रणव

भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाला

भुवः = दुख़ों का नाश करने वाला

स्वः = सुख़ प्रदाण करने वाला

तत = वह, सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल

वरेण्यं = सबसे उत्तम

भर्गो = कर्मों का उद्धार करने वाला

देवस्य = प्रभु

धीमहि = आत्म चिंतन के योग्य (ध्यान)

धियो = बुद्धि, यो = जो, नः = हमारी, प्रचोदयात् = हमें शक्ति दें (प्रार्थना)