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मंगलवार, 25 जनवरी 2022

राजस्थान राज्य की विधायिका। Rajsthan Vidhiyak GK in Hindi

 राजस्थान राज्य की विधायिका

राजस्थान राज्य की विधायिका। Rajsthan Vidhiyak GK in Hindi


 

 राजस्थान राज्य की विधायिका (Rajsthan Vidhiyak GK in Hindi)

  • हमारे देश में शासन व्यवस्था के लिये शक्ति पृथक्करण के सिद्धान्त को अपनाया गया है जिसे प्रसिद्ध राजनीति विज्ञानवेत्ता मोन्टेस्क्यू ने दिया था। यह सिद्धान्त बताता है कि कानून निर्माण की शक्ति (विधायिका)उसको लागू करने की शक्ति (कार्यपालिका) तथा कानून व्यवस्था एवं न्याय निर्णय की शक्तियाँ (न्यायपालिका) अलग-अलग निहित होनी चाहिये। भारत के संविधान के अनुच्छेद 168 में उल्लेखित है कि प्रत्येक राज्य हेतु एक विधानमण्डल अथवा विधायिका होगी। विधायिका से तात्पर्य है जो व्यवस्था को बनाये रखने हेतु विधि निर्माण करती हो। इसे व्यवस्थापिका अथवा विधान मण्डल भी कहते हैं ।

 

  • राजस्थान भारत का एक ऐसा राज्य हैजहाँ एक सदनीय व्यवस्थापिका का प्रावधान हैजिसे 'विधानसभाकहते हैं। राज्य विधानसभा राज्य के लिये संविधान के अनुसार विधि निर्माण करती है। इसके सदस्यों अर्थात् वि आयकों का चुनाव राज्य के मतदाता करते हैं। वर्तमान में राजस्थान की विधानसभा में सीटों की कुल संख्या 200 है।


विधानसभा का सदस्य बनने हेतु सामान्य योग्यतायें

राज्य विधानसभा का सदस्य बनने हेतु कुछ सामान्य योग्यतायें निर्धारित है जो कि निम्नलिखित हैं-

 

  • वह भारत का नागरिक हो । 
  • वह न्यूनतम आयु 25 वर्ष पूर्ण कर चुका हो ।
  • संसद द्वारा विधि से निर्धारित अन्य योग्यताएँ धारण करता हो । 
  • वह राज्य अथवा भारत सरकार के अधीन किसी लाभकारी पद को धारण नहीं करता हो । 
  • वह सक्षम न्यायालय के द्वारा विकृत मानसिकता का तथा दिवालिया घोषित नहीं हो ।


विधायिका तथा इसके सदस्यों का कार्यकाल 

  • विधायिका तथा इसके सदस्यों का कार्यकाल साधारणतया 5 वर्ष होता हैजो शपथ ग्रहण से माना जाता है। राज्य में संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपात्काल लगा होने पर संसद द्वारा विधि पूर्वक विधान सभा का एक बार में एक वर्ष का कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है। साथ हीराज्यपाल के प्रतिवेदन पर राष्ट्रपति संवैधानिक तंत्र के विफल होने पर समय से पूर्व भी विधानसभा भंग कर सकता है तथा इसके साथ ही राष्ट्रपति शासन प्रभावी हो जाता है।


राजस्थान की विधायिका या विधानसभा की गणपूर्ति व सत्र

  • राजस्थान की विधायिका या विधानसभा की गणपूर्ति सदन की कुल सदस्य संख्या का 1 / 10 भाग से होती है। गणपूर्ति के अभाव में किया गया कार्य असंवैधानिक होता है। संवैधानिक प्रावधान के अनुरूप एक वर्ष में न्यूनतम दो सत्र अवश्य हों तथा दो सत्रों के मध्य 6 माह से अधिक का अन्तर नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार वर्तमान में बजट सत्रशीतकालीन सत्रमानसून सत्र आदि प्रत्येक वर्ष में आहूत करती है।

 

 राजस्थान राज्य  विधानसभा के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष

  • राज्य व्यवस्थापिका या विधान सभा अपना एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष का निर्वाचन करती है। विधानसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के कार्य लोकसभा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष की भांति सदन का नियमपूर्वक संचालन करनासदस्यों के विशेषाधिकारों की सुरक्षाअनुशासन एवं शांति रखनासदस्यों को प्रश्न पूछने प्रस्ताव तथा विधेयक प्रस्तुती की अनुमति देनामतदान कराने पर परिणाम की घोषणा आदि कार्य करते हैं। अध्यक्ष को सदस्यों द्वारा 14 दिन पूर्व सूचना देकर विशिष्ट बहुमत से हटाया भी जा सकता है। अध्यक्ष अपना त्यागपत्र उपाध्यक्ष को दे सकता है। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष कार्य देखता है. 

 

विधानसभा की प्रमुख शक्तियाँ एवं कार्य

  • राज्य की विधानसभा की शक्तियाँ व कार्य भी लोकसभा की तरह है। वह संविधान की राज्य सूची व समवर्ती सूची में निर्धारित विषयों पर विधि निर्माण करती है। राज्य सूची में 66 तथा सम्वर्ती सूची में 47 विषय हैं। राज्य के लिए वित्तीय स्वीकृति का कार्य करती है अर्थात् विधानसभा बजट पारित करती है। कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है। आवश्यकता पड़ने पर संविधान संशोधन की स्वीकृति दे सकती है। विधानसभा सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग लेते हैं।