विश्व के प्रथम ज्ञात गणितज्ञ महात्मा लगध |Mahatma Lagadha, the world's first known mathematician - Daily Hindi Paper | Online GK in Hindi | Civil Services Notes in Hindi

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गुरुवार, 6 अक्तूबर 2022

विश्व के प्रथम ज्ञात गणितज्ञ महात्मा लगध |Mahatma Lagadha, the world's first known mathematician

विश्व के प्रथम ज्ञात गणितज्ञ महात्मा लगध

विश्व के प्रथम ज्ञात गणितज्ञ महात्मा लगध |Mahatma Lagadha, the world's first known mathematician



विश्व के प्रथम ज्ञात गणितज्ञ महात्मा लगध

 पुस्तक चर्चा/राजेश्वर त्रिवेदी


            वैदिक गणित भारत में कई हजारों वर्षों से जाना जाता है। वैदिक गणित शब्द उस गणित को इंगित करता है जिसका मूल वेदों में है। फिरवेद क्या हैवेद का अर्थ है ज्ञानजिसमें आध्यात्मिक ज्ञान और सांसारिक ज्ञान दोनों शामिल हैं। लगभग 1500 ईसा पूर्व के भारत के महान गणितज्ञ लगध ने वेदांग ज्योतिष की अपनी पुस्तक में कहा है कि ‘‘एक मोर की शिखा की तरह और नागों के फण पर रत्नों की तरहगणित सभी ज्ञान प्रणालियों के शीर्ष पर है।‘‘ महात्मा लगध भारतीय ऋषि परंपरा के एक अग्रगण्य नाम हैजिन्होंने वशिष्ठमनुपौलस्त्यलोमश मरीचिअंगिराव्यासनारदशौनक तथा भृगु आदि की गणितीय परंपरा को प्रशस्त किया है। वेदांग ज्योतिष के प्रथम गणितज्ञ के रूप में लगध को वैश्विक मान्यता प्राप्त है। लगध ऋग्वेदीय वेदांग ज्योतिष के कर्ता के रूप में सर्वमान्य हैं। शोधकर्ता उनका समय कलि सम्वत् 1301, विक्रम संवत् पूर्व 1743, या कहें कि ईसवी पूर्व 1800 निर्धारित करते हैं।  लगध लिखित वेदांग ज्योतिष को ज्योतिर्विज्ञान का मूलग्रंथ माना जाता है। लगध के वेदांग ज्योतिष के बाद आगे के वक्त में वराहमिहिरआर्यभटभास्कराचार्यब्रह्मगुप्त आदि ने ज्योतिर्विज्ञान को और अधिक विकसित तथा समृद्ध किया। भारत विद्या के अध्येता मैक्समूलर के अनुसार लगध का यह ग्रंथ आकाशीय ग्रहों के बारे में वह ज्ञान प्रदान करता है जो वैदिक यज्ञादि के दिन-मुहूर्त निर्णय के लिए आवश्यक है।

            महात्मा लगध का जन्म स्थान के विषय में माना जाता है कि वे कश्मीर के अवंतिपुरा या वर्तमान में प्रचलित नाम अवंतिपोर के निवासी थे। किशोरावस्था में ही विद्यार्जन के लिए महर्षि संदीपनी के आश्रम उज्जैन आए थे। देश के अग्रणी गणितज्ञ-रचनाकार डॉ. घनश्याम पाण्डेय ने लगध को केंद्र में रखकर जिस ऐतिहासिक उपन्यास ‘महात्मा लगध‘ को रचा है वह इस महान गणितज्ञ के जीवन और उनकी अमर कृति ‘वेदांग ज्योतिष‘ का सप्रमाण विवरण प्रस्तुत करता है।

            अंक विद्या पृथ्वी तल पर ज्ञान की समस्त शाखाओं में गणित का उद्भव प्राचीनतम है। आदिमानव जब से अपने दो नेत्रों तथा एक हाथ की पाँच अंगुलियों की पहचान करने लगा थावही गणित का मूल स्रोत है। मानव सभ्यता एवं संस्कृति का प्राचीनतम प्रलेख वेदों में संचित है। चारों वेदों में ऋग्वेद सबसे प्राचीन एवं वृहत् है। वैदिक काल के ऋषियों द्वारा देवी-देवताओं की प्रशस्ति में विविध प्रकार के छंदों में मंत्रों की रचना की गई थी। प्रसंगवश इन मंत्रों में गणित के कुछ मूल तत्व भी समाहित हैंजो उस युग में प्रचलित गणित की कतिपय विधाओं को प्रकट करते हैं। यद्यपि ‘गणित‘ शब्द का उल्लेख ऋग्वेद में नहीं हैकिन्तु यजुर्वेद की एक ऋचा (सत्यवाणी) में ‘गणक‘ अर्थात् गणितज्ञ को सम्माननीय कहा गया है। यह सुविदित है कि वैदिक युग के गणितीय ज्ञान का बड़ा भाग तिरोहित हो गया थाजिसके नवीकरण में वेदांग ज्योतिष का महान योगदान रहा हैजो विश्व गणित के इतिहास की अमूल्य निधि है। 9 एवं 0 के संकेतों द्वारा वृहत एवं लघु संख्याओं वस्तुतः 1, 2 को व्यक्त करने की विधि ही समस्त गणितविज्ञान तथा टेक्नालॉजी मूल में अन्तर्निहित हैजिसके नवीकरण का श्रेय महात्मा लगध को दिया जाता है। भारत वर्ष के इस अद्वितीय महान गणितीय योगदान की लाप्लासहरमन हैंकलअल्बर्ट आइन्स्टीनए.एल. बाशम प्रकृति लोकविश्रुत विद्वानों द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की गई हैजिनके शब्दशः विवरण ग्रन्थ में प्रस्तुत किए गए हैं। लगभग 18 अध्याय वाली इस ऐतिहासिक औपन्यासिक कृति में लेखक घनश्याम पाण्डेय ने अपनी कल्पनाशीलता और शोध से लगध की जीवन यात्रा को बहुत ही विस्तृत ढंग से चित्रित करने का प्रयास किया है।

            लगध की सुदूर कश्मीर से उज्जैन तक की यात्रा के सजीव वर्णन से शुरू होने वाली यह कृति महर्षि सांदीपनि के गुरुकुल वहाँ की शिक्षा पद्धतिपरिवेश और उन समस्त बातों को उल्लेखित करती है जो ज्ञानार्जन के लिए आवश्यक रही है। वस्तुतः लगध द्वारा विरचित वेदांग ज्योतिष का मूल उद्देश्य गणित के अनुप्रयोग द्वारा एक ऐसी पंचांग पद्धति का विकास करना था जो सरल ढंग से चंद्र वर्षसौर वर्ष एवं सावन वर्ष के मध्य सामंजस्य स्थापित कर सके। इस कार्य में लगध पूर्णतः सफल रहे। महान गणितज्ञ वेदांग ज्योतिष के रचयिता महात्मा लगध की जीवन यात्रा को यह कृति बहुत ही विस्तृत रूप से कहती है। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा प्रकाशित यह उपन्यास लगध के जीवन का इतिवृत्तात्मक वर्णन नहीं है बल्कि इसके माध्यम से लगध के गणित और ज्योतिष सम्बन्धी योगदान को रेखांकित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।